NRC का दर्द – मेरी 70 साल की मां को जेल भेजने के बजाय जहर दे दूं तो वह ठीक है

5:36 pm Published by:-Hindi News
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असम में एनआरसी का अंतिम प्रकाशन 31 अगस्त को होना है। लेकिन जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है। लोगों में डर बढ़ता जा रहा है। दरअसल, इस दिन 2 लाख लोगों की नागरिकता का फैसला होना है।

असम के होजई शहर में रहने वाले 40 वर्षीय ऑटोमोबाइल पार्ट्स के व्यवसायी मनोज दास गुस्से में अपनी बात रखते हैं। वह कहते हैं कि वे मेरी मां को जेल भेज देंगे। इससे अच्छा है कि मैं उसे जहर दे दूं। मनोज कहते हैं कि उनकी मां कमला दास 70 साल पूरे करने वाली हैं। पिछले साल जुलाई में प्रकाशित एनआरसी के मसौदे में जिन 40 लाख लोगों को शामिल नहीं किया गया था उनमें उनकी मां भी शामिल थी।

मनोज का कहना है कि बेसब्री से एनआरसी के अंतिम सूची का इंतजार कर रहा हूं। हाथ में एक लैमिनेशन कराया हुआ पीले रंग का किनारे फटा हुआ कागज थामे, दास कहते हैं कि उनकी मां को भारतीय नागरिक साबित करने का यही अंतिम दस्तावेज है।

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यह उनके पिता बिश्वेवर दास की 1948 में डिक्लयेरेशन का पूर्वी पाकिस्तान से आए शरणार्थी का सर्टिफिकेट है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि एनआरसी में नाम को शामिल करने के लिए यह पर्याप्त सबूत नहीं है। हालांकि, मनोज दास, उनकी पत्नी, पिता और बच्चों का नाम एनआरसी में शामिल है।

होजई जिले के ही 33 वर्षीय व्यवसायी अब्दुल मतीन भी काफी परेशान हैं। उनकी 24 साल की पत्नी नसीमा बेगम एनआरसी के मसौदे में अपना नाम दर्ज नहीं करा सकी थीं। मतीन कहते हैं कि उनकी पत्नी का परिवार के साथ संबंध के बारे में ग्राम पंचायत से जारी सर्टिफिकेट को खारिज कर दिया गया है। इसके बाद उन्होंने निकाहनामा दाखिल किया है।

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