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असम में एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीज़ंस) को लागू करने के बाद से ही देश की राजनीति में घमासान मचा हुआ है। एनआरसी मे शामिल न हो पाए 40 लाख लोगों को मीडिया ने बांगलादेशी घुसपेठिया करार दे दिया। जबकि सरकार का कहना है कि सभी को अपनी नागरिकता साबित करने के कई मौके दिये जाएंगे।

इस बीच इस बात का खुलासा हुआ है कि भारत ने एनआरसी का अंतिम मसौदा जारी होने से पहले ही बांग्लादेश से इस बाबत अनौपचारिक तौर पर चर्चा की थी। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने 13 जुलाई को ढ़ाका दौरे के दौरान बांग्लादेश के गृहमंत्री असाजुद्दीन खान से एनआरसी के व्यापक रूपरेखा और इसके लिए भारत सरकार द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी थी। लेकिन इस द्विपक्षीय वार्ता में प्रत्यर्पण पर किसी तरह की चर्चा नहीं हुई थी।

राजनाथ सिंह ने खान को आश्वासन दिया कि अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को बांग्लादेश वापस भेजने पर दोनों देशों के बीच कोई बातचीत नहीं होगी। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर संचालित की जा रही है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह और असम के मुख्यमंत्री सरबानंद सोनोवाल के बयान ने बांग्लादेश नेतृत्व को किसी तरह के प्रत्यर्पण नहीं होगा, इस संबंध में बताया है।

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बता दें कि इस मसले पर बांग्लादेश के गृहमंत्री अस-दुजमान खान ने बुधवार ‘News18’ के साथ फोन पर हुई बातचीत में कहा था कि ‘असम एनआरसी के दूसरे ड्राफ्ट में 40 लाख लोगों के नाम नहीं हैं। इन्हें बांग्लादेशी बताया जा रहा है, जिसके पीछे कोई तर्क या ठोस सबूत नहीं है। ये भारत का आतंरिक मामला है, जिसे उसे खुद ही अपने स्तर पर सुलझाना होगा। उम्मीद है कि भारत 40 लाख बेघर लोगों को बांग्लादेश नहीं भेजेगा।’

अस-दुजमान खान ने कहा, ‘1971 के बंटवारे के बाद कुछ लोग बांग्लादेश छोड़कर चले गए थे। जिन लोगों ने देश छोड़ा था, वो अब कहीं न कहीं बस चुके हैं। सहमति समझौते के तहत बांग्लादेश के कुछ लोगों ने भारत में भी शरण ली थी, लेकिन बाद में उन्हें वापस भेज दिया गया, जहां उनका पुनर्वास कर दिया गया। इसके बाद भारत में किसी भी बांग्लादेशी शरणार्थी के होने की रिपोर्ट उनकी सरकार के पास नहीं है।’

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