नई दिल्ली | जब 2009 में तत्कालीन मनमोहन सरकार ने सभी नागरिको के यूनिक आइडेंटिफिकेशन नम्बर योजना की शुरुआत की , उस समय बीजेपी की ज्यादातर राज्य सरकारो ने इसका विरोध किया था. इनमे गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी का नाम भी शामिल था. उन्होंने इसे भारतीय नागरिको की सुरक्षा के लिए खतरा बताया था. लेकिन केंद्र में सत्ता पर विराजमान होते ही मोदी और बीजेपी ,दोनों के UID को लेकर विचार बदल गए.

अब मोदी सरकार आधार कार्ड (UID) को इतना लाभदायक मान रही है की ऐसी कोई योजना नही है जहाँ इसे अनिवार्य नही किया जा रहा हो. लेकिन यह सब इंसानों के लिए तो ठीक था लेकिन गायो को आधार कार्ड के दायरे में लाने के बारे में शायद ही किसी न सोचा हो. जी हाँ, यह सच है, मोदी सरकार गायो के भी आधार कार्ड बनाने पर विचार कर रही है.

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस बारे में जानकारी देते हुए कहा की गायो की सुरक्षा और संरक्षण के लिए इनका आधार कार्ड बनाये जाने पर विचार किया जा रहा है. इससे गायो को लोकेट और ट्रैक करने में मदद मिलेगी. इसके अलावा गाय की नस्ल, उम्र , रंग और बाकी चीजो का भी ध्यान रखा जा सकेगा. हालाँकि यह बेहद चौकाने वाली जानकारी है लेकिन केंद्र सरकार इस पर आगे बढ़ने का फैसला कर चुकी है.

सरकार ने कुछ दिन पहले गायो की हिफाजत और उनकी देखरेख के लिए एक कमिटी का गठन किया था. इस कमिटी ने सरकार को कुछ सुझाव दिए है जिसको सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा. इसमें हर जिले के अन्दर 500 पशुओ की क्षमता वाले संरक्षण गृह बनाने की सिफारिश अहम् है. इसके अलावा दूध देना छोड़ देने के बाद ऐसे पशुओ का क्या किया जाये, इसके बारे में भी कुछ सिफारिशे दी गयी है.

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