केंद्र की मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट कर दिया कि पुराने 500 और 1000 के नोटों को बदलने के लिए अब मौका नहीं दिया जाएगा.

केंद्र की और से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि ऐसा करने से नोटबंदी का मकसद खत्म हो जाएगा. ज्सिके चलते अब ऐसा मौका देना मुनासिब नहीं है. केंद्र ने साथ ये भी शंका जताई कि ऐसे में बेनामी लेनदेन और नोट जमा कराने के मामले बड़े पैमाने पर सामने आयेंगे.

दरअसल, पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि क्या वह लोगों को पुराने नोट जमा कराने के लिए एक और मौका दे सकती है. साथ ही कोर्ट ने सवाल किया था कि अगर कोई व्यक्ति उस दौरान बीमार हो गया और नोट नहीं जमा करा पाया तो उसे उसकी वैध रकम को जमा कराने से कैसे रोका जा सकता है ?

65 पेज के अपने हलफनामा में केंद्र ने कहा कि ये फैसला बहुत ही सोच-समझ कर लिया गया है. सरकार ने ये भी स्पष्ट किया कि वर्ष 8 नवंबर की अधिसूचना में व्यक्ति को स्वयं अथवा किसी अधिकृत एजेंट या व्यक्ति के जरिये पुराने नोट जमा कराने की छूट दी गई थी.

अब  इस मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को होने वाली है. 18 जुलाई को ही तय हो सकेगा कि जिन लोगों के पास पुराने बंद हो चुके करेंसी नोट हैं उनका क्या किया जाएगा.

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