नई दिल्ली । इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान छात्रों को तकनीकी से सम्बंधित विषयों को पढ़ना पड़ता है। चार साल के कोर्स के दौरान छात्रों को कुछ बेसिक विषयों को भी पढ़ाया जाता है। इनमे फ़िज़िक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स जैसे विषय शामिल है। लेकिन अब छात्रों को कुछ ऐसे विषय भी पढ़ाए जाएँगे जो इंजीनियरिंग से सम्बंधित न होकर धार्मिक परंपराओं से सम्बंधित है। हालाँकि पर्यावरण विज्ञान के बारे में छात्रों को पहले ही पढ़ाया जा रहा है।

दरअसल आल इंडिया काउन्सिल फ़ोर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) ने इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम में बदलाव किया है। नया पाठ्यक्रम इसी साल से लागू किया जाएगा। इसमें कुछ चौकाने वाले विषयों को जोड़ा गया है। जिनमे वेद, पुराण, शास्त्र जैसे विषय शामिल है। मतलब अब इंजीनियरिंग छात्रों को तकनीकी विषयों के अलावा वेद पुराण की भी शिक्षा लेनी होगी।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि पाठ्यक्रम को नए सिरे से तैयार किया गया है, क्योंकि अपडेटेड सेलेबस छात्रों का आधिकार है। भारतीय परंपराओं के ज्ञान वाले इन कोर्स में भारतीय दार्शनिक, भाषा, योग और कलात्मक परंपराओं पर ध्यान दिया जाएगा। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य थोट प्रोसेस, तर्क और इनफ्रेंसिंग के बुनियादी सिद्धांतों के बारे में बताना है।

हालाँकि समय समय पर तकनीकी शिक्षा के पाठ्यक्रम अप्डेट किए जाते है लेकिन यह पहली बार होगा जब ग़ैर तकनीकी विषय भी इसमें जोड़े गए है। प्रकाश जावडेकर के अनुसार इन विषयों के ज्ञान से इंजीनियरिंग छात्रों को समाज से जुड़ने में मदद मिलेगी। हालाँकि इन विषयों के मार्क्स फ़ाइनल मार्कशीट में नही जोड़े जाएँगे। इन सबके बीच सरकार के इस फ़ैसले पर राजनीति भी शुरू हो सकती है। लोग इसे आरएसएस के अजेंडा के साथ जोड़कर भी देख सकते है।

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