दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम के खिलाफ FIR दर्ज की है। वह शाहीन बाग में नागरिकता विरोधी प्रदर्शन के आयोजकों में से एक है। इससे पहले असम पुलिस ने गुवाहाटी में इमाम के खिलाफ आतंकवाद विरोधी गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के एफआईआर दर्ज की थी।

एशियन न्यूज इंटरनेशनल के अनुसार, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत धारा 153 (जानबूझकर दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। दरअसल, शरजील इमाम पर हिंदुस्तान से असम को अलग करने का भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। इमाम उत्तर-पूर्व भारत को शेष भारत से काटने की बात करते हैं।

शरजील इमाम पर केस दर्ज होने के बाद असम के कैबिनेट मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा है कि हम संतुष्ट है कि शरजील इमाम के खिलाफ मामला दर्ज करने का फैसला कर चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘हम संतुष्ट हैं कि हम शरजील इमाम के खिलाफ मामला दर्ज करने का फैसला कर चुके हैं। अगर यह साबित नहीं हुआ तो अलग बात है।’ इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘लेकिन मुझे लगता है कि यह देश में पहली बार है कि मुसलमान हिंदुओं, ईसाई, सिख, बौद्धों के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। हमने कभी विरोध नहीं किया जब मुसलमानों को अलग पर्सनल नागरिकता कानून दिया गया।’

शरजील का नया वीडियो

शरजील का नया वीडियो सामने आया है जो दिल्ली के जमिया का है। इस वीडियो में वह यह कहता दिख रहा है कि हमारी ख्वाहिश और आरजू है कि दिल्ली में चक्का जाम हो, दिल्ली ही नहीं पूरी दुनिया में चक्का जाम हो जिस शहर में मुसलमान कर सकता है. दिल्ली पुलिस ने इस वीडियो को लेकर एफआईआर दर्ज किया है।

वह आगे कहता है कि मुसलमान हिंदुस्तान के कई शहरों में चक्का जाम कर सकता है. क्या मुसलमानों में इतनी हैसियत नहीं कि उत्तर भारत के शहरों को बंद किया जा सके। वह आगे कहता दिख रहा है कि यूपी के शहरों में मुसलमानों की आबादी 30 फीसदी है। अरे भाई शर्म करो। 30 फीसदी के ऊपर तो शहर चल क्यों रहा है। हिंदुस्तान का मुसलमान शहर में रहता है, शहरी है, शहर बंद कीजिए।

एसएसपी अलीगढ़ आकाश कुलहरि का कहना है कि शरजील फिलहाल अंडरग्राउंड हो गया है, लेकिन पुलिस उसे पकड़ने की कोशिश में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि शरजील इमाम की गिरफ्तारी के लिए अलीगढ़ से 2 टीमों को रवाना कर दिया गया है और उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

वहीं शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों ने इमाम की टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया और कहा कि शाहीन बाग में भाषण नहीं दिया गया था।

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