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दिल्ली वक्फ़ बोर्ड के अधीन आने वाली दिल्ली की मस्जिदों के इमामों के आगे से शाही शब्द को हटाने के लिए दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली वक्फ बोर्ड और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को नोटिस जारी किया है.

याचिका मे कहा गया है कि मस्जिदों के इमाम वक़्फ़ बोर्ड के नियुक्त किये गए कर्मचारी हैं. लिहाजा समानता के अधिकार के दायरे मे आते हैं और कोई भी सरकार से संबंधित बोर्ड के लोग इस शाही शब्द का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं.

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याचिकाकर्ता ने कहा है कि संविधान की धारा 18 के मुताबिक कोई भारतीय नागरिक विदेशी पद ग्रहण नहीं कर सकता है. शाही शब्द मुगलकालीन है और इसका अर्थ है कि शाह यानि बादशाह द्वारा नियुक्त व्यक्ति.

याचिका में कहा गया है कि रायबहादुर, सवाई, रायसाहब, जमींदार, तालुकदार इत्यादि पद मध्यकालीन और ब्रिटिश शासन के दौरान दिए जाते थे. ये सभी पदवियां संविधान की धारा 18 के तहत समाप्त कर दी गई हैं.

ऐसे में दिल्ली में जामा मस्जिद, फतेहपुरी समेत पूरे देश में मस्जिदों का नेतृत्व करने वाले लोग अपने नाम के आगे शाही इमाम लगा रहे है यह न सिर्फ नियमों के खिलाफ है बल्कि संविधान के अनुछेद 14 समानता के अधिकार का उल्लंघन भी है.

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