प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आठ नवंबर की रात को लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद देश भर की जनता पर मुसीबतों का पहाड़ टुटा हैं. ये मुसीबतें अब भी खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. ऐसे में खुलासा हुआ हैं नोटबंदी के कारण देश की महिलाओं को घरेलू हिंसा यानि अपने पतियों के जुल्मों का शिकार होना पड़ा हैं.

भोपाल में देश के पहले वन स्टाप क्राइसिस सेन्टर के अनुसार उनके सेंटर के टॉल फ्री नंबर पर नोटबंदी के बाद 1200 कॉल आए. उन्होंने बताया कि इससे पहले हर महीने केवल 500 कॉल आया करते थे. उन्होंने आगे बताया कि इन 1200 कॉल में से 230 को काउंसलिंग की जरुरत पड़ी.

वन स्टाप क्राइसिस सेन्टर की अध्यक्ष सारिका सिन्हा ने बताया कि जब पतियों को पता चला कि उनकी पत्नियों ने बिना उन्‍हें बताए पैसे छुपाकर रखे तो वे नाराज हो गए. पतियों ने पत्नियों को धमकाया, पीटा और जेल जैसे अंजाम भुगतने को लेकर भी डराया.

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सेंटर की कॉर्डिनेटर शिवानी सैनी ने एक 27 साल की महिला के केस का उदाहरण देते हुए बताया कि नौ नवंबर को जब उसके पति को पता चला कि उसके पास 4500 रुपये हैं तो उसने सात बच्‍चों सहित उसे घर से बाहर निकाल दिया. एक अन्‍य मामले में पति ने 13 साल की बेटी के इंसुलिन इंजेक्शन के लिए पत्‍नी को पैसे देने से मना कर दिया. साथ ही पत्‍नी को ससुराल भेज दिया.

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