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नोटबंदी को लेकर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पहली बार ब्यान देते हुए गुरुवार को कहा कि नोटबंदी से इकोनॉमी में अस्थायी तौर पर मंदी आ सकती है. उन्होंने कहा कि इसे फैसले से अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो सकती है. यह असर कुछ समय के लिए ही पड़ेगा. हमें गरीबों को दिक्कतों से बाहर निकालने के लिए इस मामले में ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

देश भर के राज्यपालों और उपराज्यपालों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि नोटबंदी से निश्चित ही गरीबों की परेशानियां बढ़ी हैं.  उन्होंने आगे कहा कि ‘वह इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि गरीबों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की कोशिशें हो रही हैं और संभवत: नोटबंदी से लंबे समय में गरीबों को फायदा होगा.’

हालांकि इसके साथ ही राष्ट्रपति ने कहा ‘उन्हें संदेह है कि गरीब इतना लंबा इंतजार नहीं कर सकते. इसलिए यह जरूरी है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से मदद मुहैया कराई जानी चाहिए, ताकि वे भी भूख, बेरोजगरी और शोषण रहित भारत की ओर अग्रसर हो सकें.

राष्ट्रपति ने साथ ही पांच राज्यों में अगले महीने शुरू होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर कहा कि चुनाव में विभिन्न समुदायों के बीच तनाव पैदा किया जाता है, जिससे समाज को नुकसान होता है. ऐसे में समाज में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए राज्यपाल और उपराज्यपाल को अहम भूमिका निभानी चाहिए.


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