नोटबंदी का आजीविका के हर क्षेत्र पर प्रभाव पड़ा हैं. ऐसे में नोटबंदी से कृषि क्षेत्र भी अधुरा नहीं रहा हैं.कृषि संगठनों से जुड़े नेताओं का दावा हैं कि नोटबंदी से किसानों को हर एकड़ पर 50 हजार रु तक का नुकसान का सामना करना पड़ रहा हैं.

भारत कृषक समाज के चेयरमैन अजय वीर जाखड़ ने बताया, ”जो किसान फल और सब्जियां बोते हैं उन्‍हें औसतन 20 से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ का नुकसान झेलना पड़ा है. यह नुकसान बहुत ज्‍यादा है.” जाखड़ ने आगे बताया कि यदि किसान को बुवाई की लागत के बराबर पैसा नहीं मिलेगा तो वह खेती नहीं करेगा. यदि एक किसान अपनी उपज को बाजार में ले जाता है और वह नहीं बिकती है या कीमत कम है तो वह उसे फेंकता है.

वहीँ किसान जागृति मंच के अध्‍यक्ष सुधीर पंवार ने बताया कि किसानों की हालत बहुत खराब है. उन्‍होंने कहा, ”जब व्‍यापारी कहता है कि फसल को खरीदने के लिए पैसा नहीं है तो किसान क्‍या करेगा? या तो मामूली कीमत पर बेचेगा या फेंकेगा. चैक काम नहीं आ रहे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो कैशलेस का प्रस्‍ताव रखा है उसे किसान अपना नहीं पा रहे हैं. नतीजा यह है कि कीमतें जमीन पर हैं”

गौरतलब है कि देश भर में सही भाव ना मिलने पर किसानों ने टमाटर और मटर सहित कई सब्जियों को सड़कों पर डाल दिया तो कई जगहों पर फ्री में बेचा. ऐसे में किसान नुकसान उठा रहे हैं.


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