सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी के राष्ट्रगान नहीं गाने से वह देशद्रोही नहीं हो जाता या ये नहीं माना जा सकता है कि वो कम देशभक्त है.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने इस पुरे मामले को केंद्र के पाले में डालते हुए कहा कि केंद्र को लगता है कि राष्ट्रगान के समय सभी को खड़ा रहना चाहिए तो वह इसके लिए कानून क्यों नहीं बना लेती? सरकार राष्ट्रीय ध्वज संबंधित कानून में खुद बदलाव क्यों नहीं करती/ हर काम अदालत के पाले में क्यों डालती है.

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ध्यान रहे 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने थियेटरों में फिल्म शुरु होने से पहले राष्ट्रगान और दर्शकों के लिए खड़ा होना अनिवार्य कर दिया था. लेकिन अब कोर्ट ने कहा कि केन्द्र सरकार को सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने के बारे में उसके पहले के आदेश से प्रभावित हुए बगैर ही इस पर विचार करना होगा.

सुनवाई के दौरान केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि भारत एक विविधता वाला देश है और एकरूपता लाने के लिए सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाना आवश्यक है.

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि ये भी देखना चाहिए कि सिनेमाघर में लोग मनोरंजन के लिए जाते हैं. ऐसे में देशभक्ति का क्या पैमाना हो, इसके लिए कोई रेखा तय होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट 9 जनवरी को मामले में अगली सुनवाई करेगा.

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