नागरिकता के नाम पर मुस्लिमों के साथ भेदभाव वाला नागरिकता (संशोधन) बिल 2016 लोकसभा में तो पास हो गया है। हालांकि राज्यसभा में यह हंगामे की भेंट चढ़ गया। दरअसल, विपक्ष के विरोध के चलते यह पास नहीं हो सका।

बता दें कि नागरिकता (संशोधन) बिल, 2016 के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मुहैया कराने का प्रावधान है। इस बिल में इन देशों से आने वाले मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता नहीं मिलेगी।

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धार्मिक आधार पर भेदभाव को लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 1947 में मजहब के आधार पर विभाजन नहीं होता तो अच्छा होता। अखंड भारत रहता। विडंबना रही कि धर्म के आधार पर विभाजन हुआ। भारत, पाकिस्तान सबको इस बात की चिंता थी कि धार्मिक अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान की तत्कालीन सरकारों के बीच समझौतों के बावजूद पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को समान अधिकार नहीं मिल पाए।

राजनाथ सिंह ने कुछ सदस्यों के सवालों पर कहा कि बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में मुस्लिम बहुसंख्यक हैं. उसके लिए एक प्रोटोकॉल है। उन्हें दीर्घकालीन वीजा दिया जा सकता है। भारत में पाकिस्तान के लोगों को न केवल दीर्घकालीन वीजा देने के उदारहण हैं, बल्कि नागरिकता भी दी गयी।

राजनाथ सिंह ने कहा, “धार्मिक आधार पर नागरिकता के आरोप निराधार हैं। बड़ी संख्या में बहुसंख्यक लोगों को भी भारत में नागरिकता मिलती रही है।” उन्होंने नागरिकता दिये जाने के समर्थन में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन नेता सुचेता कृपलानी के बयानों को भी उद्धृत किया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का जो भी मूल निवासी है भले ही वह ईसाई रहा हो अगर उसका पाकिस्तान आदि देशों में धार्मिक उत्पीड़न हो रहा हो तो उसे भारत की नागरिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार बोडो समुदाय की मांगों के बारे में न केवल चिंता करती है बल्कि इसके लिये प्रतिबद्ध भी है।

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