नई दिल्ली | कालेधन और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए मोदी सरकार द्वारा उठाया गया नोट बंदी का कदम कितना कारगार साबित हुआ , यह तो सरकार के आंकड़े ही बता सकते है लेकिन इस फैसले का विरोध और फेवर करने वाले काफी लोग है. हालाँकि सरकार ने अभी तक यह नही बताया की नोट बंदी के फैसले से कितना कालाधन पकड़ा गया और बैंकों में वापिस कितना पैसा लौट आया लेकिन कुछ रिपोर्ट्स बताती है की नोट बंदी से देश को काफी नुक्सान हुआ है जबकि बैंकों में लगभग 97 फीसदी करेंसी वापिस लौट आई.

नोट बंदी का विरोध करने वालो की फेहरिस्त में अब अमेरिका के मशहूर शास्त्री स्टीव एच हांक का नाम भी जुड़ गया है. उन्होंने नोट बंदी को हारने वालो के लिए बताया और कहा की खुद मोदी जी भी नही जानते की देश किस और जा रहा है. स्टीव इससे पहले भी नोट बंदी की आलोचना कर चुके है. तब उन्होंने कहा था की भारत के पास नोट बंदी को स्वीकार करने के लिए जरुरी ढांचागत सुविधा नही है, उन्हें यह पता होना चाहिए.

स्टीव ने ट्वीट कर नोट बंदी पर अपनी राय रखते हुए लिखा, ‘ नोट बंदी हारने वालो के लिए है और इसे शुरू से ही गलत तरीके से लागु किया गया. कोई नही , बल्कि खुद प्रधानमंत्री मोदी भी नही जानते की देश किस और जा रहा है’. स्टीव वाशिंगटन में कातो इंस्टिट्यूट में निदेशक पद पर कार्यरत है. उनको अर्थशास्त्र में एक बड़ा नाम माना जाता है.

स्टीव हांक से पहले नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन भी नोट बंदी की आलोचना कर चुके है. हालाँकि सरकार कहती आई है की नोट बंदी से देश की अर्थव्यवस्था को काफी फायदा होंगा और जनता सरकार के फैसले के साथ है. लेकिन विपक्ष लोगो को हो रही परेशानी को सामने रख सरकार पर लगातार हमले कर रहा है. विपक्ष का कहना है की नोट बंदी की वजह से देश एक दशक पिछले हो गया है. लोगो के रोजगार छीन गए है और किसान अपनी फसल की बुआई नही कर सका.


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