Thursday, July 29, 2021

 

 

 

143 जिलों में एक भी आईसीयू बेड नहीं, आखिर कैसे लड़ेगा भारत कोरोना की जं’ग?

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केंद्र सरकार ने रविवार को देश में घातक कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में राज्यों की तैयारी से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की है। जिसमे बताया, भारत के 140 से अधिक ऐसे जिले हैं, जहां ना तो आईसीयू की सुविधा है और ना ही वेंटिलेटर की।

केंद्र सरकार ने भी यह बात मान ली है. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), बिहार (Bihar)  और असम Assam) की स्थिति सबसे खराब है। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों ने भाग लिया। बता दें कि भारत में कोरोना वायरस (Coronavirus) के करीब 28 हजार के सामने आ चुके हैं और 885 लोगों की मौ’त हो गई है।

बैठक में प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश भर के 183 जिलों में 100 से कम आइसोलेशन बेड हैं। इनमें से 67 जिलों में कोरोना वायरस के मामले सामने आ चुके हैं। उत्तर प्रदेश के 75 में से 53 जिलों में 100 से कम आइसोलेशन बेड हैं। इनमें 31 जिलों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों की पुष्टि हो चुकी है।

बिहार 38 में से 20 जिलों के साथ 100 से कम आइसोलेशन बेड के साथ देश में दूसरे नंबर पर है। जिन जिलों में आईसोलेशन बेड कम हैं, ऐसे 9 जिलों में कोरोना वायरस के मामले में सामने आए हैं। इसके अलावा असम के 33 से में 19 जिलों में 100 से कम आइसोलेशन बेड हैं और ऐसे छह जिलों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। आइसोलेशन बेड की कमी से जूझ रहा असम लिस्ट में तीसरे नंबर पर है।

प्रेजेंटेशन के मुताबिक देश के 143 जिलों में आईसीयू बेड ही नहीं हैं। खास बात है कि इनमें से 47 जिलों में कोरोना वायरस के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों की संख्या भी उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक है। प्रदेश के 34 जिलों में एक भी आईसीयू बेड नहीं है। ऐसे 19 जिलों में संक्रमण के मामले सामने आए हैं।

इस मामले में मध्य प्रदेश दूसरे नंबर हैं, जहां 31 जिलों में एक भी आईसीयू बेड नहीं है। इन्हीं 11 जिलों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि भी हो चुकी है। लिस्ट में बिहार तीसरे नंबर है, जहां ऐसे जिलों की संख्या 29 है और 10 जिलों में संक्रमण के मामलों की पुष्टि हो चुकी है।

इसके अलावा देश के 123 जिलों में जीरो वेंटीलेटर बेड हैं। इनमें से 39 जिलों में संक्रमण के मामले देखे गए हैं। जिन जिलों में वेंटिलेटर नहीं है ऐसे यूपी में 35 जिले हैं और इनमें से 20 जिलों में कोरोना के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे जिलों की संख्या बिहार में 28 और असम में 17 है। जिनमें क्रमश: 10 और 3 जिलों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है।

बैठक में 3 मई के अनुमानों के आधार पर बुनियादी ढांचे की कमी की संभावना को भी चिह्नित किया। उदाहरण के लिए इसमें सुझाव दिया कि मुंबई 2 मई तक ऑक्सीजन के साथ आइसोलेशन बेड की कमी का सामना कर सकता है। अनुमान है कि प्रदेश में 2 मई तक 9632 कोरोना केस हो सकते हैं। बैठक में देश के ऐसे दस जिलों का भी रिकॉर्ड दर्ज किया गया है जहां सबसे अधिक कोरोना मरीजों के लिए बेड का इस्तेमाल किया गया है।

जैसे उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में 30 बेड हैं और कोरोना के एक्टिव केस 62 है। सूरत में 253 बेड हैं और एक्टिस मामलों की संख्या 440 है। मुंबई में कुल 2260 बेड हैं मगर कोरोना के रिकॉर्ड 3615 मरीज हैं। मरीजों की संख्या के चलते बेड की कमी का सामना कर रहे दस जिलों में चार यूपी और दो गुजरात के हैं।

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