bl15_04_jaineo_2932207f

नई दिल्ली | नोट बंदी के फैसले के बाद, मोदी सरकार ने अनेको बार नियम बदले है. ताजे नियम में सरकार की और से कहा गया है की 5000 रूपए से अधिक के पुराने नोट एक बार में ही बैंकों में जमा होंगे. इसके अलावा पैसा जमा कराने वाले शख्स से बैंक के दो अधिकारी पूछताछ करेंगे और उससे पूछेंगे की अभी तक ये पैसा बैंक में जमा क्यों नही कराया. अब इस नियम पर सरकार का स्पष्टीकरण आया है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा की सरकार की तरफ से ऐसा सर्कुलर जरुर जारी किया गया लेकिन इसमें एक संसोधन यह की एक बारे में , 5000 रूपए से अधिक के पुराने नोट बैंक में जमा कराने वाले शख्स से कोई पूछताछ नही होगी. वो जितना चाहे पैसा जमा करा सकता है लेकिन शर्त यह है की उसको एक बार में ही सारा पैसा बैंक में जमा कराना होगा.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

जब इस नियम के पीछे के तर्क को पूछा गया तो जेटली ने कहा की कुछ आवश्यक सेवाओं और क्षेत्रो में पुराने नोट स्वीकार करने की छूट दी गयी थी. इसकी समयावधि पिछले हफ्ते खत्म हो चुकी है. तो हमारा मानना है की जिसके पास पुराने नोट थे , वो उन्हें बैंक में जमा करा चूका है. और अगर कोई बार बैंक में जाकर पैसा जमा कर रहा है तो फिर संदेह पैदा होता है.

जेटली ने आगे कहा की कोई शख्स से बैंक में रोज जाता है और थोड़े थोड़े पुराने नोट जमा कराता है तो शक पैदा होता है की आखिर उसके पास पुराने नोट आ कहाँ से रहे है. अगर कोई भी शख्स अभी भी बंद किये हुए नोटों को स्वीकार करता है तो उसे इसकी अनुमति नही है. जिसके पास भी जितना पुराना नोट है , वो उसे बैंक में जमा कराये. रही बात 5000 रूपए से अधिक के नोट जमा कराने की तो मैं बताना चाहूँगा की जिसके पास जितने भी पुराने नोट हो वो उसे तुरंत बैंक में जमा कराये. एक बार में सारे पैसे जमा कराने वाले से कोई पूछताछ नही होगी.

मालूम हो की सरकार को शक है की कालेधन के ठेकेदार, अपने धन को सफ़ेद करने के लिए बैंक अकाउंट का सहारा ले रहे है. इस पर रोक लगाने के लिए सरकार ने पुराने नोट जमा कराने पर सीमा तय कर दी. हालांकि सरकार के इस कदम की आलोचना भी हुई. रोबर्ट वाड्रा ने तो मोदी सरकार पर सभी वित्तीय संस्थाओ को पूछताछ केंद्र बनाने का आरोप लगा दिया.

Loading...