Tuesday, January 25, 2022

सोशल मीडिया को आधार से जोड़ने पर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने दी बड़ी जानकारी

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सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि सरकार के पास लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट को आधार से जोड़ने का कोई प्रस्ताव नहीं आया है। उन्होंने बुधवार को लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि यूनिक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) की पॉलिसी के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति के आधार का गैर-कानूनी तरीके से इस्तेमाल करने, उसे ट्रैक करने और और उसकी प्रोफाइल तैयार करना प्रतिबंधित है। यहां तक कि आधार को बनाते वक्त या उसे अपग्रेड करते वक्त व्यक्ति के बायोमैट्रिक्स को इनक्रिप्टेड रखा जाता है और इसे किसी से भी साझा नहीं किया जाता है।

प्रसाद ने कहा, “आधार तीन कोर सिद्धांत पर आधारित है- न्यूनतम सूचना, अपरिहार्य जानकारी और सुरक्षित डाटाबेस। व्यक्ति के पूरे जीवन में एक आधार डाटाबेस में केवल वही जानकारी होती है, जो व्यक्ति आधार बनवाते वक्त या अपडेशन के समय प्रदान करता है। आधार बनवाते वक्त या अपडेशन के दौरान जो जानकारी दी जाती है, उसे व्यक्ति के मोबाइल और ईमेल पर भी साझा किया जाता है।”

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बता दें कि भाजपा नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सोशल मीडिया अकाउंट्स को आधार से जोड़ने की मांग की गई थी। अश्विनी उपाध्याय का दावा था कि इससे फर्जी खबरों, अश्लील कंटेंट और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर लगाम लगायी जा सकेगी।

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगा था। सरकार के जवाब के बाद ही सुप्रीम कोर्ट इस पर कोई फैसला देने वाला था। बहरहाल अब सरकार ने संसद में साफ कर दिया है कि उसकी फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है।

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