Monday, May 16, 2022

रैली की तैयारियों में जुटे रहे NDA के नेता, शहीद पिंटू सिंह को श्रद्धांजलि देने कोई नहीं पहुंचा

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पटना: जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में एन्काउंटर में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवान पिंटू कुमार सिंह का पार्थिव शरीर पटना एयरपोर्ट लाया गया। जहां उनको श्रद्धांजलि देने के लिए डीएम-एसएसपी और एक कांग्रेस के नेता के अलावा कोई नहीं पहुंचा जबकि पटना में इस समय एनडीए के सभी बड़े नेता मौजूद हैं क्योंकि आज गांधी मैदान में पीएम मोदी की अगुवाई में रैली होने वाली जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी हिस्सा लेंगे।

ऐसे में बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने पीएम मोदी और नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। तेजस्वी यादव ने कहा कि मोदी जी बिहार में शहीदों की चिता ठंडी भी नहीं हुई. आप अपनी निचले स्तर की राजनीति चमकाने बिहार आ रहे हैं। तेजस्वी ने पहला ट्वीट किया, ‘मोदी जी, बिहार में शहीदों की चिता ठंडी भी नहीं हुई। एक शहीद का पार्थिव शरीर भी बिहार नहीं आया है और आप अपनी निम्नस्तरीय राजनीति चमकाने बिहार की महान धरती पर आए है। बिहारी बहुत जागरूक है वो आपकी लफ्फाजी और जुमलेबाज़ी में फंसने वाले नहीं है। आपके पहले के वादों का क्या हुआ?’

पिंटू सिंह 2009 में सीआरपीएफ में ज्वाइन किया था। आठ साल तक वह मोतिहारी के मधुबन में पदस्थापित थे। उसके बाद 2017 में उनकी पोस्टिंग 92 बीएन में श्रीनगर हो गयी। 2011 में उनकी शादी बेगसूराय के ही सबलदपुर में अंजू सिंह से हुई थी। श्रीनगर ट्रांसफर होने के बाद पत्नी व बेटी माड़ीपुर में किराये की मकान में रहते हैं।

शहीद पिंटू सिंह के साले पंकज कुमार ने बताया कि वह सहरसा में थे जब उन्हें सूचना मिली कि उनके बहनोई शहीद हो गए है। जिसके बाद वो आनन फानन में मुज़फ़्फ़रपुर पहुंचे। परिजनों ने बताया कि सीआरपीएफ कंट्रोल से बातचीत के दौरान जानकारीमिली है कि शव का हंडवारा में पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। शनिवार देर रात पटना लाया जायेगा. उसके बाद शव को पैतृक गांव भेजा जायेगाव को रिसीव करने के लिए रात में परिवार के सदस्य पटना एयरपोर्ट के लिए रवाना हो जायेंगे।

सीआरपीएफ के शहीद इंस्पेक्टर पिंटू सिंह पांच भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके बड़े भाई अमलेश सिंह, मिथलेश सिंह, इंद्रेश सिंह, मनीष सिंह सभी गांव में ही किसानी करते हैं। छोटे भाई की मौत के बाद बेसुध इंद्रेश सिंह ने बताया कि पिंटू पूरे परिवार का ख्याल रखता था। भतीजा राजन को सेना की वर्दी में देखना चाहता था। वह हमेशा राजन को सेना में भर्ती होने के लिए कड़ी मेहनत करने को प्रेरित करता था।

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