सुन्नी मुसलमानों की छह सौ साल पुरानी दरगाह मदारुल आलमीन की ओर से फतवा जारी कर कहा गया कि मादरे वतन के खिलाफ बोलने वाला या उसके खिलाफ जंग छेड़ने वाला मुसलमान नहीं हो सकता। अगर कोई मुसलमान ऐसा करता है तो वह खुद ब खुद इस्लाम से खारिज हो जाएगा।

दरअसल तहरीके मदारिस काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. सैयद इंतखाब आलम ने पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर फिदायीन हमले और दहशतगर्दी पर यह फतवा मांगा था। इसमें पुलवामा हमले के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए उस वीडियो का जिक्र किया था जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के दहशतगर्द आदिल अहमद डार ने अपनी करतूत को इस्लाम का काम बताते हुए दावा किया था कि इस हमले में मरने के बाद वह जन्नत के मजे लेगा।

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दरगाह मदारुल आलमीन की ओर से कुरान की रोशनी में इस सवाल पर जारी फतवे में कहा गया है कि खुदकुशी करना इस्लाम में हराम है। आत्मघाती हमले में किसी की जान लेना उससे भी बड़ा गुनाह है।

हाफिज फै•ान ने कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले को निंदा करते हुए कहा कि हम सभी लोगों को एकजुट होकर यह लड़ाई लड़नी होगी और आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देकर इसका सफाया करना होगा तभी हमारे देश के वीर शहीदों की आत्मा को शांति मिलेगी।

उन्होंने ने कहा कि इस्लाम आतंकवाद की नाम नहीं है, एकता का नाम इस्लाम हैं। धर्म के नाम पर जो लोग दंगा भड़काने का काम करते हैं, उन्हें अल्लाह माफ नहीं करेगा।

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