अपने राजनीतिक, व्यावसायिक हितों और अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए बजरंग दल पर प्रतिबंध न लगाने को लेकर आलोचन झेल रही फेसबुक कंपनी के इंडिया चीफ अजित मोहन बुधवार को संसद की एक समिति के समक्ष पेश हुए। इस मामले में उन्होंने समिति को स्पष्ट किया कि बजरंग दल पर बैन लगाने का कोई कारण नहीं मिला।

कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसद की स्थायी समिति ने उन्हें नागरिक डाटा सुरक्षा के मुद्दे पर तलब किया था। मोहन के साथ फेसबुक के लोक नीति निदेशक शिवनाथ ठुकराल भी थे। इस दौरान उनसे अमेरिका के मशहूर अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जनरल’ की एक रिपोर्ट को लेकर सवाल किए गए।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बजरंग दल पर प्रतिबंध की बात से जुड़े आंतरिक मूल्यांकन के बावजूद फेसबुक ने वित्तीय कारणों और अपने कर्मचारियों की सुरक्षा चिंताओं के कारण उस पर लगाम नहीं लगाया। दरअसल, एक वीडियो में बजरंग दल ने जून में दिल्ली के बाहर एक चर्च पर हमले की जिम्मेदारी ली थी। फेसबुक पर यह वीडियो को लगभग 2.5 लाख बार देखा गया।

हालाँकि, सुरक्षा दल की एक आंतरिक रिपोर्ट के बाद कंपनी ने बजरंग दल को प्रतिबंधित नहीं किया, साथ ही चेतावनी दी थी कि समूह में “भारत में कंपनी की व्यावसायिक संभावनाओं और उसके कर्मचारियों दोनों के लिए खतरा हो सकता है”। बजरंग दल के अलावा, फेसबुक की सुरक्षा टीम ने दो अन्य दक्षिणपंथी समूहों, सनातन संस्था और श्री राम सेना को भी मंच से प्रतिबंधित करने के खिलाफ चेतावनी दी थी।

इसके अलावा, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने उनसे पूछा कि अगर बजरंग दल की सामग्री को उनकी सोशल मीडिया नीतियों का उल्लंघन नहीं पाया गया, तो फेसबुक ने वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट को अस्वीकार क्यों नहीं किया और इसे फर्जी करार क्यों नहीं दिया।

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