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1965 की जंग के दौरान जब भारत की आर्थिक स्थिती बेहद कमजोर हो गई थी और देश इस स्थिति में नहीं था कि वह युद्ध लड़ सके। ऐसे में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने संभावित खतरों से निपटने के लिये देश के बड़े – बड़े रजवाड़ों, उद्योगपतियों से आर्थिक सहायत करने की अपील की थी। जब इन सबने एक स्वाभिमानी प्रधानमंत्री की अपील को नहीं माना, तो प्रधानमंत्री ने हैदराबाद का रुख किया उन्हें मालूम था कि निजाम हैदराबाद मीर उस्मान अली उन्हें खाली हाथ नहीं लौटायेंगे।

निजाम मीर उस्मान अली ने भारत सरकार को पांच टन सोना राष्ट्रीय रक्षा कोष की स्थापना के लिये देने की घोषणा की निजाम की इस घोषणा ने सबको हैरत में डाल दिया क्योंकि किसी भी एक व्यक्ति द्वारा दान में दी जानी वाली यह सबसे बड़ी रकम थी। आज के सोने के मूल्य में इस रकम को देखा जाये तो यह 1600 करोड़ से अधिक है। बता दे कि मीर उस्मान अली विश्व के सबसे अमीर लोगों में शुमार है। मीर उस्मान अली दुनिया के इतने अमीर शख्स थे कि उनकी कुल संपत्ति अमेरिका की अर्थव्यवस्था का 2 प्रतिशत थी। इसी के चलते टाइम पत्रिका ने 1937 में उनकी फोटो को अपनी मैगजीन के कवर पर लगाई थी।

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जब चीन ने खड़ी की मुसीबत-

1965 की बात है जब भारत पाकिस्तान से युद्ध जीता ही था की उसे चीन ने आंखें दिखाना शुरू कर दिया था। उस समय तिब्बत को आजाद करवाने के लिए चीन ने भारत को चुनौती दे डाली। क्योंकि अभी हाल ही में भारत एक युद्ध से गुजरा ही था इसलिए चीन दूसरा युद्ध अनुचित था। हालाँकि ऐसे समय में भी भारतीय सैनिकों में किसी तरह के जोश की कमी नही थी। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती थी हथियार और गोला बारूद की। उस समय भारत सरकार धन की कमी से जूझ रही थी। क्योंकि पाकिस्तान के साथ युद्ध में काफी धन खर्च हो चुका था। तब प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने सेना की मदद के लिए भारतीय रक्षा कोष की स्थापना की और उन्होंने लोगों से सेना की मदद की अपील की।

मुसीबत के समय में सामने आए निजाम-

प्रधानमंत्री शास्त्री ने रेडियो द्वारा लोगों और राजे-रजवाड़े से सेना के लिए मदद मांगी। प्रधानमंत्री की इस बात को हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली भी सुन रहे थे। उन्होंने तुरंत शास्त्री जी को हैदराबाद आने के लिए निमंत्रण भेज दिया। निजाम का निमंत्रण मिलते ही शास्त्री जी तुंरत ही हैदराबाद पहुंच गए। निजाम उस्मान अली ने उनका बेगमपेठ एयरपोर्ट पर स्वागत किया। शास्त्री जी ने निजाम को पूरी बात बताई निजाम ने बिना सोचे अपना खजाना भारत की रक्षा के लिए खोल दिया। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा कोष के लिए 5 टन सोना देने का ऐलान कर दिया। निजाम ने पीएम शास्त्री के सामने 5 टन सोने के बक्से रखकर मुस्कुराते हुए बोले मैं ये पांच टन सोना भारत की सेना के लिए दान कर रहा हूँ, इसे स्वीकार करें और निडर होकर जंग लड़ें, हम जरूर जीतेंगे।

इसके बाद निजाम के चर्चे दुनिया में होने लगे-

निजाम उस्मान अली की इस दरियादिली की खबर जैसे ही मीडिया को लगी वैसे ही पूरे देश में इसके चर्चे होने लगे। हर किसी ने निजाम उस्मान अली की इस दरियादिली की न सिर्फ तारीफ की बल्कि उन्हें धन्यवाद भी कहा। विदेशी मीडिया ने भी इस घटना को कवर किया जिससे निजाम के चर्चे पुरी दुनिया में होने लगे।

साभार: यंगिस्तान डॉट कॉम

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