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नागपुर. नागपुर में डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) के प्रोजेक्ट ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट से ब्रह्मोस मिसाइल के सीक्रेट पाकिस्तान और अमेरिया को देने वाले निशांत अग्रवाल को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। उसने ये जानकरी कनाडा में 30 हजार डॉलर की जॉब के लिए बेची।

एक अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद हुई निशांत से पूछताछ में उन्होंने बताया कि उन्हें पाकिस्तानी महिला (डील का प्रबंधन करने वाली) के द्वारा अच्छे जॉब का ऑफर दिया गया था और जाल में फंसाया गया। जांच में ये सभी खाते पाकिस्तान के पाए गए हैं।

जांच कर रही टीम यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है क्या निशांत को पाक हैंडलरों ने पैसे भी भी दिए हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है ब्रह्मोस इंजीनियर निशांत फेसबुक पर ‘नेहा शर्मा’ और ‘पूजा रंजन’ नाम से चल रहे दो फर्जी एकाउंट के जरिए पाकिस्तान के संदिग्ध खुफिया सदस्यों से संपर्क में था।

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इस बीच यूपी एटीएस की टीम हैदराबाद पहुंचकर एक कंपनी से भी पूछताछ कर रही है, जहां पहले निशांत काम कर चुका है। एटीएस ने निशांत अग्रवाल का पर्सनल लैपटॉप, उसका मोबाइल और पीडीएफ जब्त कर लिया। वहीं, उसके बैंक अकाउंट और ट्रांजेक्शन की भी जांच की जा रही है।

निशांत अग्रवाल चार सालों से ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट के प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे। उन्हें युवा वैज्ञानिक पुरस्कार भी मिल चुका है। उनके फेसबुक अकाउंट पर इसकी तस्वीर भी है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी कुरुक्षेत्र से इंजीनियरिंग कर चुके निशांत आईआईटी रूड़की में रिसर्च इंटर्न रह चुके हैं।

बता दें कि ब्रह्मोस एयरोस्पेस का गठन भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के ‘मिलिट्री इन्डस्ट्रीयल कंसोर्टियम’ (एनपीओ मशिनोस्त्रोयेनिया) के बीच संयुक्त उद्यम के रूप में किया गया है। भारत और रूस के बीच 12 फरवरी, 1998 को हुए एक अंतर-सरकारी समझौते के माध्यम से यह कंपनी स्थापित की गई थी।

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