नई दिल्ली | साढ़े चार साल पहले दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया. कोर्ट का फैसला आते ही दिल्ली के आरके पुरम सेक्टर 3 स्थित रविदास कैंप सन्नाटा छा गया. यहाँ रहने वाले लोगो को उम्मीद थी की सुप्रीम कोर्ट आरोपियों को अपनी गलती सुधारने का एक मौका जरुर देगा. लेकिन कोर्ट ने निर्भया केस को जघन्य करार देते हुए सभी दोषियों को फांसी की सजा सूना दी.

दरअसल दिल्ली के इसी रविदास कैंप में निर्भया गैंगरेप के दोषी विनय , पवन , मुकेश , राम सिंह के परिवार रहते थे. इनमे से मुकेश और राम सिंह का परिवार पहले ही कैंप को छोड़कर जा चूका है जबकि मामले का दोषी नाबालिग भी अब यहाँ नही रहता. अब यहाँ केवल पवन और विनय का परिवार रह रहा है. जैसे ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, सबसे ज्यादा दुःख पवन की नाबालिग बहन को हुआ.

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पवन की बहन ने आंसू पोछते हुए कहा की यह फैसला गलत है. कोर्ट को गलती सुधारने के लिए भाई को एक मौका देना चाहिए था. हम पिछले चार साल से सजा भुगत रहे है. भाई के गम में मेरी बड़ी बहन की भी मौत हो चुकी है. कोर्ट को भाई की एक गलती को माफ़ कर देना चाहिए था. हालाँकि विनय का परिवार भी यही रहता है लेकिन फैसले के बाद से उसका घर बंद है.

फैसले के समय विनय के पडोसी उसके घर के सामने बैठे हुए थे. वो भी कोर्ट के फैसले से थोडा परेशान दिखे. उनमे से एक ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा की उन्हें सुधरने का मौका मिलना चाहिए था. लेकिन अगर एक आम नागरिक की तरह देखा जाए तो इस जघन्य अपराध को गलती नही कहा जा सकता. जिस घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया हो वो केवल गलती नही हो सकती और उसकी केवल एक ही सजा होनी चाहिए.