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जैन मुनि आचार्य निर्भय सागर ने मध्‍य प्रदेश विधानसभा परिसर में रविवार (7 अक्‍टूबर) को आयोजित एक कार्यक्रम में जैन मुनि के जोड़ो से कम से कम चार बच्‍चे पैदा करने की अपील की। उन्होने कहा कि ऐसा नहीं किया गया तो ”100 सालों बाद उनका धर्म बच नहीं पाएगा।”

उन्‍होंने कहा, ”देश में समुदाय की वर्तमान जनसंख्‍या करीब 50 लाख है। अगर हर परिवार में केवल एक या दो बच्‍चे होंगे तो अगले 50 सालों में जनसंख्‍या 25 लाख तक घट जाएगी और फिर अगले चार दशक में छह लाख तक सिमट जाएगी। आप मंदिर बना सकते हैं लेकिन पूजा करने के लिए धर्म के लोग तो चाहिए।”

कार्यक्रम में आचार्य सागर ने सरकार ने कहा कि वह ऐसा नियम बनाए जिसके तहत 25 साल से कम उम्र की महिलाओं की दूसरे धर्म में शादी पर रोक हो। अभिभावकों से कहा गया कि उनके बच्‍चे दूसरे धर्म में शादी करें तो कोई सामाजिक कार्यक्रम न करें।

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वहीं जैन नेता पंकज प्रधान ने कहा, ”जब माता-पिता को शादी के लिए एक रिश्‍ता मिल जाए, तब लड़कियां 18 की उम्र में शादी कर सकती हैं लेकिन तब नहीं जब वह खुद दूसरे धर्म से लड़का ढूंढकर ले आएं। इस कार्यक्रम में कई प्रस्‍ताव पास हुए जैसे- शादियों में सड़कों पर महिलाओं के नाचने पर और विवाह समारोहों में लजीज व्‍यंजनों की भरमार करने पर रोक लगाई गई। जैन शादियों में 21 या इससे कम व्‍यंजन रखने की बात तय हुई।

2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में जैन धर्म के करीब 45 लाख अनुयायी हैं जो कुल जनसंख्‍या का 0.4 प्रतिशत है। मध्‍य प्रदेश में 5.67 लाख जैन (कुल जनसंख्‍या का 0.78 प्रतिशत) रहते हैं, जबकि महाराष्‍ट्र में 14 लाख (कुल जनसंख्‍या का 1.25 प्रतिशत), राजस्‍थान में 6.22 लाख (कुल जनंसख्‍या का 0.91 प्रतिशत) और गुजरात में 5.79 लाख (कुल जनसंख्‍या का 0.96 प्रतिशत) जैन निवास करते हैं।

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