Thursday, October 28, 2021

 

 

 

भगोड़े नीरव मोदी के पक्ष में काटजू ने दी गवाही – ‘भारत में न्यायपालिका का अधिकांश हिस्सा भ्रष्ट’

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पीएनबी घोटाले के मुख्य आरोपी भगोड़े नीरव मोदी के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू शुक्रवार को लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में भारत से लाइव वीडियो लिंक के पेश हुए। बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर उन्होने कहा कि नीरव मोदी को भारत में निष्पक्ष ट्रायल नहीं मिल पाएगा।

एनडीटीवी के अनुसार, काटजू ने लिखित और मौखिक दावे करते हुए कहा कि भारत में न्यायपालिका का अधिकांश हिस्सा भ्रष्ट है और जांच एजेंसियां सरकार की ओर झुकाव रखती हैं, लिहाजा नीरव मोदी को भारत में निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिलेगा। काटजू के इन दावों पर भारत सरकार की ओर से मुकदमा लड़ रही ब्रिटेन की क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने पलटवार किया।

बैरिस्टर हेलेन मैल्कम ने सवाल किया, ”क्या ऐसा संभव है. आप स्वघोषित गवाह हैं, जो कुछ भी बयान दे सकते हैं।” इस पर काटजू ने जवाब दिया, ”आप अपने विचार रखने के हकदार हैं।”  मैल्कम ने इस विचाराधीन मामले में ब्रिटेन की अदालत में पेश किये जाने वाले सबूतों के संबंध में इस सप्ताह की शुरुआत में भारत में मीडिया को साक्षात्कार देने के काटजू के फैसले के बारे में भी सवाल किया, जिसपर काटजू ने कहा कि वह केवल पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे और ”राष्ट्रीय महत्व” के मामलों पर बोलना उनका कर्तव्य है।

काटजू ने आरोप लगाया कि भारत में न्यायिक व्यवस्था चौपट हो गई है। उन्होंने दावा किया कि जांच एजेंसियां जैसे- सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय राजनीतिक गुरुओं के इशारों पर काम कर रही हैं। काटजू ने अपने आरोपों के समर्थन में कई केस और मुद्दों को रखा, जिनमें 2019 में पूर्व जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच की तरफ से अयोध्या पर दिया गया फैसला शामिल हैं, जिन्हें बाद में राज्यसभा का सदस्य नियुक्त किया गया।

इसके साथ ही, उन्होंने रिटायरमेंट के बाद जजों की नियुक्ति, मीडिया ट्रायल और न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का मुद्दा भी रखा। रविशंकर प्रसाद की तरफ से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नीरव मोदी को “अपराधी” कहने पर सवाल उठाते हुए काटजू ने कहा कि “भारत सरकार ने अपने दिमाग में बिठा लिया है कि नीरव मोदी एक अपराधी है। क्या रविशंकर प्रसाद जज हैं? किस तरह के वह कानून मंत्री हैं? कैसे हम निष्पक्ष ट्रायल की उम्मीद करेंगे? ”

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