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केरल में लव जिहाद की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी जांच बंद कर दी है। NIA ये जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कर रही थी।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एनआईए ने इन मामलों में अपनी जांच खत्म करते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ऐसे विवाहों में लव जिहाद जैसा कुछ नहीं था और किसी भी तरह के जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर भी कोई सबूत नहीं मिले हैं।

लव जिहाद के मामलों की जांच से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि एनआईए को कोई पुख़्ता सबूत नहीं मिले हैं। इन मामलों में यहां तक तो ठीक है कि मुस्लिम-हिंदू लड़के-लड़कियों के बीच प्रेम विवाह हुआ। यह भी सही है कि धर्म परिवर्तन भी किया गया। लेकिन यह सब किसी आपराधिक साज़िश के तहत किया गया, इसका सबूत नहीं मिला है। लिहाज़ा एनआईए अब इन मामलों में आगे कोई रिपोर्ट पेश करेगी इसकी संभावना नहीं है।

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अधिकारी ने स्पष्ट कहा, ‘जहां तक एनआईए का मामला है, हमारे लिए ये मामले बंद हाे चुके हैं। हमें ऐसे सबूत नहीं मिले हैं कि इन मामलों में किसी युवक या युवती से ज़बर्दस्ती धर्मपरिवर्तन कराया गया। हालांकि यह सही है कि धर्मपरिवर्तन कराने वालों में एक ही समूह के लोग ज़्यादा शामिल पाए गए। ये पाॅपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े लोग थे जो या तो लड़के या फिर लड़की काे इस्लाम धर्म अपनाने में मदद कर रह थे। लेकिन इन पर मुकदमा चलाने लायक सबूत नहीं मिले हैं।’

अधिकारी ने यह भी कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपने धर्म का अभ्यास और प्रचार करने का मौलिक अधिकार देता है। उन्होंने कहा, ‘केरल में धर्म परिवर्तन अपराध नहीं है और इन लोगों  धर्म परिवर्तन में मदद करना  संविधान के दायरे में आता है।’

यह जांच चर्चित हादिया मामले के चलते हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के कहने पर एनआईए ने केरल में कथित लव जिहाद के मामलों की जांच करते हुए 11 अंतरधार्मिक शादियों की पड़ताल की थी। यह 11 मामले 89 अंतरधार्मिक शादियों में से चुने गए हैं, जो पहले से ही (ज्यादातर मामलों में अभिभावकों की शिकायतों के चलते) कानूनी प्रक्रिया में हैं, जिन्हें केरल पुलिस द्वारा एजेंसी को भेजा गया था।

मालूम हो कि केरल के कोट्टायम ज़िले की अखिला अशोकन उर्फ हादिया ने धर्म परिवर्तन के बाद शफीन जहां से निकाह किया था। इस मामले को हादिया के पिता अशोकन ने लव जिहाद का नाम देते हुए केरल उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था, जिसने यह शादी रद्द कर दी थी, लेकिन बीते 8 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया था।

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