मालेगांव ब्लास्ट मामलें में आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही बॉम्बे हाई कोर्ट के समक्ष मंगलवार को एनआईए की और से सबूत के तौर पर टूटी सीडी पेश की गई. इसी के साथ एक अन्य सीडी पेश की गई जिसमे केवल ऑडियो साउंड हैं.

दरअसल, बॉम्बे हाई कोर्ट ने एनआईए को आरोप पत्र के साथ सबूत के तौर पर कुछ सीडी को अदालत में पेश करने का आदेश दिया था. एनआईए ने मंगलवार को ट्रायल कोर्ट से सभी सीडी मंगाकर पेश कीं. एनआईए की मांग पर जस्टिस मोरे और शालिनी फंसलकर जोशी की बेंच ने बंद कमरे में सीडी को देखा. लेकिन अदालत में पेश सीडी में से एक टूटी हुई पाई गई. एक सीडी में सिर्फ आवाज सुनाई दे रही थी, वीडियो नहीं दिख रहा.

इसके अलावा आर्टिकल नंबर 200 में संलग्न 11 सीडी के शीर्षक पढ़ने के बाद अदालत ने पाया कि वे सभी सीडी इस जमानत अर्जी की सुनवाई के लिए जरूरी नहीं हैं. साध्वी की जमानत अर्जी पर अब अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी.

29 सितंबर 2008 को हुए बम धमाके में सात लोगों की मौत हुई थी और करीब 79 जख्मी हुए थे. जांच एजेंसी एटीएस ने तब मामले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर सहित 14 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था और सबूत के तौर पर साजिश की बैठकों की सीडी होने का दावा किया था. लेकिन नई जांच एजेंसी एनआईए द्वारा साध्वी प्रज्ञा ठाकुर सहित छह लोगों को क्लीन चिट दे दी गई.

हालांकि ट्रायल कोर्ट ने एजेंसी  के निष्कर्ष पर मुहर लगाने के बजाय  मुकदमे के बाद ही आरोपियों के भविष्य पर फैसला देने की बात कह साध्वी की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी.


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