वहाबी प्रचारक जाकिर नाईक के खिलाफ मुंबई की विशेष एनआईए अदालत ने एक बार फिर से गैर-जमानती वॉरंट  जारी किया है. ये वारंट उनके खिलाफ दर्ज गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून के तहत एक मामलें में जारी किया हैं. अदालत इस मामलें में एक वारंट पहले ही जारी कर चुकी हैं.

एनआईए ने अदालत को जानकारी दी कि तीन समन जारी होने के बावजूद नाइक उसके समक्ष पेश नहीं हुआ और उसे अब वापस भारत लाने के लिए उसे इंटरपोल की मदद की जरूरत होगी. इस पर विशेष न्यायाधीश वीवी पाटिल ने कहा, ‘नाइक के खिलाफ गैर जमानती वारंटी जारी किया जाए’.

वहीँ मलेशिया में रह रहे जाकिर नाईक ने इंडिया आने से साफ़ इनकार कर दिया हैं. उन्होंने कहा कि एनआईए मुझे भगोड़ा बताने की बजाय मुझ से मलेशिया में आकर पूछताछ करे. उन्होंने कहा कि मै विडियो कांफ्रेंस के जरिए भी अपना पक्ष रखने को तैयार हूँ.

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साथ ही भारत सरकार को उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय या मलेशिया की अदालत में उनके खिलाफ मामला उठाना चाहिए. भारत आने को लेकर उन्होंने कहा कि वह भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से समक्ष खुद को पेश करने के लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने कहा कि भारत में मुस्लिमों के साथ दुर्व्यवहार होता हैं. और इसके कई उदाहरण हैं.

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