असम के विस्वनाथ जिले के चाराली में शौकत अली नामक मुस्लिम बुजुर्ग के साथ मारपीट कर जबरदस्ती सुअर का मांस खाने को मजबूर करने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने असम सरकार को एक लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया है।

आयोग ने इस तथ्य को भी गंभीरता से लिया कि न तो मुख्य सचिव ने कारण बताओ नोटिस का जवाब दिया और न ही पुलिस महानिदेशक ने मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपी। अब आयोग ने असम सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि पीड़ित शौकत अली को 1,00,000 रुपये की राशि जारी करे और छह सप्ताह के भीतर आयोग को भुगतान के सबूत के साथ एक रिपोर्ट सौंपे।”

पूर्व में भेजे गए कारण बताओ नोटिस में, एनएचआरसी ने उल्लेख किया कि “प्रथम दृष्टया यह पीड़ित के मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला है, जिसके लिए राज्य पीड़ित को मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी है”। आयोग ने इस मामले को पीड़िता के मानवाधिकारों का उल्लंघन भी माना।

इस घटना का वीडियो कुछ ही समय बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। में शौकत अली बुरी तरह घायल हैं और घुटने के बल बैठे हुए हैं। भीड़ में मौजूद लोग उनसे कई सवाल पूछे रहे हैं। वीडियो में सुनाई दे रहा है कि भीड़ में शामिल लोग पूछ रहे हैं कि गोमांस क्यूं बेच रहे हो? लाइसेंस कहां है, क्या तुम बांग्लादेशी हो?

घटना के बाद शौकत अली के छोटे भाई अब्दूल रहमान ने बीबीसी को बताया था, “मेरे पिता और भाई (शौकत) पिछले 40 साल से बिश्वनाथ चारआली के साप्ताहिक बाजार में होटल चलाते आ रहे हैं। पिता के गुज़र जाने के बाद मेरे बड़े भाई शौकत होटल चलाते हैं। पहले यहां कभी ऐसी घटना नहीं हुई। उन लोगों ने मेरे भाई को बुरी तहर पीटा है। उनकी हालत काफी नाज़ुक बनी हुई है। वो बोल नहीं पा रहे हैं।”

वो कहते हैं, ” क़रीब 10 से 15 लोग अचानक भाई की दुकान में आ गए और तलाशी लेने लगे। चावल, दाल, मुर्गा और मछली का होटल है तो मीट तो मिलेगा ही।  शक के आधार पर वो लोग मेरे भाई को दूकान से अपने साथ ले गए। साप्ताहिक बाजार के ठेकेदार ने भी भाई की मदद नहीं की। बाज़ार में सबके सामने उनकी पिटाई की गई लेकिन कोई बचाने नहीं आया। बाद में उन लोगों ने मेरे भाई के मुंह में ज़बरन सुअर का मांस डाल दिया। “

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