कोरोना के चलते देश भर में जारी लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों को अपने घरों को भेजने के लिए चलाई गई श्रमिक ट्रेनों में प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से रेलवे को नोटिस जारी किया गया है।आयोग (NHRC) ने केंद्रीय गृह सचिव, रेलवे और गुजरात और बिहार की सरकारों को भी नोटिस भेजा है।

NHRC ने एक बयान में कहा कि ‘‘राज्य ट्रेनों में सवार गरीब मजदूरों के जीवन की रक्षा करने में विफल रहा है।” बयान के मुताबि, NHRC ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर यह संज्ञान लिया है कि जो रेलगाड़ियां प्रवासी मजदूरों को ले जा रही हैं, वे न केवल देरी से शुरू हो रही हैं, बल्कि गंतव्य तक पहुंचने के लिए कई अतिरिक्त दिन ले रही हैं।

बयान में कहा गया है, ‘‘एक रिपोर्ट में, यह आरोप लगाया गया है कि कई प्रवासी मजदूरों ने ट्रेन से यात्रा के दौरान अपनी जान गंवा दी। पीने के पानी और भोजन आदि की कोई व्यवस्था नहीं है।” आयोग ने कहा, ‘‘एक अन्य घटना में, एक ट्रेन कथित तौर पर गुजरात के सूरत जिले से 16 मई को बिहार के सिवान के लिए रवाना हुई और नौ दिनों के बाद 25 मई को बिहार पहुंची।” आयोग ने कहा है कि मीडिया की खबरें अगर सही है, तो यह मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। इससे पीड़ित परिवारों को अपूरणीय क्षति हुई है।

बता दें कि प्रवासी मजदूरों के संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई जारी है। गुरुवार को सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिया है कि प्रवासी मजदूरों से घर वापसी का कोई भी पैसा नहीं लिया जाएगा, फिर चाहे वो बस या फिर ट्रेन के जरिए ही क्यों ना हो।

गौरतलब है कि रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के मुजफ्फरपुर में दो और दानापुर, सासाराम, गया, बेगूसराय और जहानाबाद में एक-एक व्यक्ति की कथित तौर पर मौ’त हो गई, जिसमें एक 4 साल का बच्चा भी शामिल है। सभी की कथित तौर पर भूख के कारण मौ’त हुई है।

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