नई दिल्ली | पिछले साल दिल्ली में यमुना किनारे हुए विश्व सांस्कृतिक महोत्सव के मामले में एनजीटी और आर्ट ऑफ़ लिविंग के आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है. एनजीटी ने रविशंकर को फटकार लगाते हुए कहा की वो जो चाहे वो नही बोल सकते. उनका बयान गैरजिम्मेदाराना है. मालूम हो की एनजीटी ने रविशंकर की संस्था पर 25 करोड़ रूपए का जुर्माना लगाया हुआ है.

दरअसल एनजीटी की एक्सपर्ट कमिटी ने आर्ट ऑफ़ लिविंग के कार्यक्रम से यमुना को पहुंचे नुक्सान सम्बन्धी रिपोर्ट सौप दी है. 47 पेज की इस रिपोर्ट में आर्ट ऑफ़ लिविंग पर कई गंभीर आरोप लगाए है. इसमें कहा गया की रविशंकर के कार्यक्रम से यमुना के फ्लडप्लेंस को काफी नुक्सान पहुंचा है. इसकी भरपाई के लिए करीब 13 करोड़ रूपए का खर्चा आएगा और इसमें दस साल का लम्बा समय लगेगा.

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रिपोर्ट में आगे बताया गया की कार्यक्रम की वजह से यमुना के किनारों की जगह उपजाऊ नही रही है. यहाँ तक की इस जमीन पर छोटे पेड़ और घास भी नही उगाये जा सकते. एक्सपर्ट कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था पर 25 करोड़ रूपए का जुर्माना लगाया. जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए रविशंकर ने कहा की अगर पर्यावरण को नुक्सान हुआ है तो इसके लिए एनजीटी, केंद्र और राज्य सरकार पर जुर्माना लगाया जाना चाहिए.

रविशंकर ने कहा था की इस कार्यक्रम के लिए एनजीटी , केंद्र और राज्य सरकार से इजाजत ली गयी थी. इसलिए इसके लिए ये तीनो जिम्मेदार है. इसके अलावा रविशंकर ने एनजीटी पर नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों को अनदेखा करने का आरोप भी लगाया. उन्होने कहा की इस पुरे एतिहासिक कार्यक्रम को एक अपराध की तरह पेश किया जा रहा है.

रविशंकर के बयान पर एनजीटी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा की आपको अपनी जिम्मेदारी का बिलकुल भी अहसास नही है. आपका बयान बिलकुल गैरजिम्मेदाराना है. क्या आपको लगता है की आपको वो सब कहने की आजादी है जो आप कहना चाहते है? इसके अलावा एनजीटी ने एक्सपर्ट पैनल की रिपोर्ट पर आर्ट ऑफ़ लिविंग और अन्य पक्षों को अपने जवाब और आपत्तियां दाखिल करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई 9 मई को होगी.

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