आंध्र प्रदेश में स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पीएसएलवी-सी37 से एक साथ 104 उपग्रह प्रक्षेपित कर इतिहास रच दिया हैं.

इसरो ने पीएसएलवी-सी 37 के जरिए सुबह 9 बजकर 28 मिनट पर 104 उपग्रहों का प्रक्षेपित किया. मिशन में मुख्य उपग्रह 714 किलोग्राम वजन वाला काटोर्सैट-2 सीरीज उपग्रह है जो इसी सीरीज के पहले प्रक्षेपित अन्य उपग्रहों के समान है. इसके अलावा इसरो के दो तथा 101 विदेशी अति सूक्ष्म (नैनो) उपग्रहों का भी प्रक्षेपण किया जाना है जिनका कुल वजन 664 किलोग्राम है.

विदेशी उपग्रहों में 96 अमेरिका के तथा इजरायल, कजाखस्तान, नीदरलैंड, स्विटजरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात के एक-एक उपग्रह शामिल हैं. दुनिया के किसी भी देश ने 104 उपग्रहों को एक साथ प्रक्षेपित करने में सफलता हासिल नहीं की है. भारत ने इससे पहले जून 2015 में एक बार में 23 उपग्रहों को प्रक्षेपण किया था.

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मंगलयान की कामयाबी के बाद इसरो की कमर्शल इकाई ‘अंतरिक्ष’ को लगातार विदेशी सैटलाइट्स लॉन्च करने के ऑर्डर मिल रहे हैं. इसरो पिछले साल जून में एक साथ 20 सैटलाइट्स लॉन्च कर चुका है. इनको पीएसएलवी-सी34 की मदद से छोड़ा गया था. इसरो पहले बीती जनवरी में ही एक साथ 83 सैटलाइट्स लॉन्च करने जा रहा था लेकिन 21 और विदेशी सैटलाइट्स लॉन्च करने का ऑर्डर मिलने पर उसने यह काम कुछ दिन के लिए टाल दिया.

इसरो के चेयरमैन एस. किरण कुमार का कहना है कि एक साथ 104 सैटलाइट्स लॉन्च करने का मकसद कोई रेकॉर्ड कायम करना नहीं है, बल्कि स्पेस मिशन्स की लागत को कम करना है. इस मिशन के तहत विदेशी सैटलाइट्स लॉन्च करने से इसरो की 50 प्रतिशत लागत वसूल हो गई है.

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