देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने 21 मार्च 2017 के एडिशन में 15 अक्टूबर 2016 को जवाहरलाल नेहरु विश्विद्यालय से लापता हुए छात्र नजीब अहमद को आईएस आतंकी करार देते हुए खबर छाप दी. हालांकि ये खबर पूरी तरह से फर्जी हैं. जिसके बाद अखबार को माफ़ी भी मांगनी पड़ी हैं.

राजेशकर झा की रिपोर्ट में नजीब के खूंखार आतंकी संगठन आईएस समर्थक होने की दलील दी गई कि पुलिस को नजीब अहमद के लैपटॉप में मौजूद ब्राउज़र की हिस्ट्री से पता चला हैं कि नजीब इस्लामिक स्टेट की विचारधारा से प्रभावित था. इसके साथ ही कहा गया कि वह इस आतंकी संगठन से जुड़ने वाला था.

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इसके साथ ही अखबार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने इस बारें में गूगल से मिली जानकारी को हाईकोर्ट में भी सबूत के तौर पर पेश किया. हालाँकि इस रिपोर्ट को दिल्ली पुलिस ने पूरी तरह से फर्जी करार देते हुए नकार दिया. जिसके बाद खबर का स्पष्टीकरण पांचवे पृष्ठ पर 22 मार्च को प्रकाशित किया गया.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने नजीब को आईएस के समर्थक की ये रिपोर्ट 570 शब्दों में पहले पृष्ठ और तीसरे पृष्ठ पर छापी थी. वहीँ रिपोर्ट का स्पष्टीकरण 75 शब्दों में पांचवे पृष्ठ पर 22 मार्च को प्रकाशित किया.

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