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बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए पूर्व एटीएस प्रमुख डीजी वंजारा समेत अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपों से बरी कर दिया है। बता दें कि निचली अदालत के के इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि इन अधिकारियों को आरोपमुक्त करने के आदेश को चुनौती देने वाली अर्जी में कोई दम नहीं है। न्यायमूर्ति बदर ने कहा कि पूर्व आईपीएस अधिकारियों वंजारा, राजकुमार पांडियन एवं एन. के. अमीन (सभी गुजरात पुलिस से) और राजस्थान पुलिस से दलपत सिंह राठौड़ की आरोपमुकत करने को चुनौती देने वाली याचिका में कोई दम नहीं है।

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सीबीआई के आरोप पत्र के अनुसार, गुजरात के एक संदिग्ध गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी को गुजरात एटीएस और राजस्थान पुलिस के अधिकारियों ने हैदराबाद के पास से अगवा कर लिया था और उन्हें नवंबर 2005 में एक फर्जी मुठभेड़ में मार दिया था।जांज एजेंसी के अनुसार इसके एक साल बाद गुजरात एवं राजस्थान पुलिस ने कथित रूप से साजिश रचकर सोहराबुद्दीन के सहयोगी तुलसी प्रजापति की हत्या कर दी।

उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद गुजरात से मुंबई भेजी गयी विशेष अदालत ने अगस्त 2016 और सितंबर 2017 के बीच 38 आरोपियों में से 15 को आरोपमुक्त किया है। जिन्हें आरोप मुक्त किया गया था उनमें 14 पुलिस अधिकारी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह शामिल हैं।

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