मुंबई: पैगंबर ए इस्लाम और उनके साथियों के अपमान के खिलाफ कार्यवाही हेतु रज़ा एकेडमी ने गुरुवार को तहफ़्फुज़ ए नामुस ए रिसालत बोर्ड का गठन किया। जो सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से होने वाली अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर कानूनी कार्यवाही करेगा।

कायद ए मिल्लत असीर मुफ़्ती ए आजम अल्हाज मुहम्मद सईद नुरी अगुवाई में हुई बैठक के दौरान बोर्ड के गठन का फैसला लिया गया। इस दौरान मौलाना मुहम्मद अब्बास रजवी ने कहा कि ‘तहफ़्फुज़ ए नामुस ए रिसालत’ हमारे लिए सब कुछ है। हम सब कुछ बर्दाश्त कर सकते है। लेकिन पैगंबर ए इस्लाम और उनके साथियों का अपमान कतई नहीं।

अल्हाज मुहम्मद सईद नुरी ने कहा, ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही हेतु एक मुहिम की जरूरत है। इस जरूरत को पूरी करने के लिए फिलहाल पाँच सदस्यीय ‘तहफ़्फुज़ ए नामुस ए रिसालत’ बोर्ड का राष्ट्रीय स्तर पर गठन किया गया। उन्होने बताया कि प्रत्येक संसदीय क्षेत्र से बोर्ड में कार्यकर्ता होंगे।

वहीं पत्रकार खलील ज़ाहिद ने कहा कि ये मुहिम जलसे-जुलूस से पूरी नहीं होने वाली है। इसके लिए राष्ट्रिय स्तर पर एक सख्त  कानून की आवश्यकता है। उन्होने पढ़े-लिखे युवाओं को मुहिम से जोड़ने पर ज़ोर दिया। उन्होने कहा कि सरकार और प्रशासन तक इस बात को पहुंचाना जरूरी है कि मुस्लिमो के लिए ये नाजुक मसला है।

इसके अलावा पत्रकार हारून अफरोज ने कहा कि ‘तहफ़्फुज़ ए नामुस ए रिसालत’ के लिए मुसलमान अपनी जान देने से भी पीछे नहीं हटेगा। उन्होने कहा, मुसलमान एक जज्बाती कौम है। ऐसे में जोश से ज्यादा होश से काम लेने की जरूरत है। सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल रज़्ज़ाक़ मानीहार ने कहा कि बोर्ड को सबसे पहले इस सबंध में महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित पांच साइबर सेल से संपर्क कर कार्यवाही की मांग करनी चाहिए।

बैठक में मुहम्मद आरिफ़ रिज़वी, मुहम्मद हसन रिज़वी, मौलाना ज़फ़रुद्दीन रिज़वी, इमरान दादनी, रमजान सोरथिया, अमीन रजनी, मुस्तफा रज़ा अमान मियां, अहमद रज़ा नूरी मियां, नाज़िम खान, शाहनवाज़ बरकाती , निजामुद्दीन रिज़वी, हमद रिज़वी, मुख्तार अंसारी और अन्य उपस्थित रहे।