मुंबई: घटकोपर स्थित मदरसा गुलशन ए अहमद रज़ा और ताहिरा मस्जिद को लेकर की जा रही तोड़फोड़ की कार्यवाही की खबरों पर रज़ा एकेडमी के प्रमुख अल्हाज मुहम्मद सईद नुरी ने कहा कि मदरसा गुलशन ए अहमद रज़ा और ताहिरा मस्जिद 50 सालों से अधिक समय से मौजूद है। उन्होने कहा कि मस्जिद और मदरसे के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्यवाही हरगिज नहीं होने देंगे।

उन्होने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मस्जिद और मदरसे का दौरा किया। उन्होने स्थानीय लोगों के हवाले से बताया कि मस्जिद में पिछले 50 सालों से पांचों वक्त नमाज होती आ रही है। साथ ही हर सप्ताह जुम्मे की नमाज अदा होती है। जिसमे बड़े पैमाने पर स्थानीय और दूसरे क्षेत्रों के भी मुसलमान नमाज अदा करने के लिए आते है।

अल्हाज मुहम्मद सईद नुरी ने कहा कि मस्जिद को 1992 और 1993 के सांप्रदायिक दंगों में निशाना बनाया गया था। दंगों के बाद श्रीकृष्ण कमीशन ने इस मस्जिद का सर्वे भी किया था। जिससे मस्जिद और मदरसे के पुराने होने की बात प्रमाणित होती है। उन्होने कहा, प्रशासन अब मस्जिद और मदरसे को नया बताकर शहीद करने पर जुटा है। जो हम किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे।

उन्होने कहा, वार्ड ऑफिसर के इस फैसले से मुसलमानों में काफी गुस्सा है। उन्होने स्पष्ट किया, मस्जिद और मदरसे की एक इंच जमीन भी किसी को नहीं दी जाएगी। जहां एक बार मस्जिद बन जाती है वो कयामत तक ही मस्जिद ही रहेगी। उसमे कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।

रज़ा एकेडमी प्रमुख ने कहा कि मस्जिद और मदरसे का 50 साल पुराना इतिहास दुनिया के सामने है। लेकिन वार्ड ऑफिसर का मस्जिद और मदरसे को शहीद करने की जीद करना तनाव पैदा कर रहा है। जिसका लाभ सांप्रदायिक संगठन और असमाजिक तत्व भी उठा रहे है। उन्होने वार्ड ऑफिसर को बर्खास्त करने की मांग की। साथ ही स्थानीय लोगों से भी शांति बनाए रखने की अपील की।

स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए उन्होने कहा कि मस्जिद और मदरसे को बचाने के लिए रज़ा एकेडमी आपके साथ खड़ी है। उन्होने स्थानीय मुसलमानों को हर संभव मदद का भी आश्वासन दिया। इस दौरान रमजान चौधरी, मौलाना अमानुल्लाह रज़ा, मौलाना मुहम्मद अब्बास रिज़वी, नाज़िम खान, असलम शेख और कई अन्य लोग मौजूद रहे।

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