लखनऊ: सर्दियों का कहर जारी है. ठंड का मौसम दिल के मरीजों की सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है। आइए जानते हैं। बलरामपुर हॉस्पिटल लखनऊ  में कार्यरत डॉक्टर  मोहम्मद युसूफ अंसारी  कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस् का सुझाव कि सर्दियों के मौसम में कैसे और किस तरह दिल की सेहत का ख्याल रखना चाहिए।

सर्दियों के मौसम में हृदय गति रुकने (हार्ट फेल) मरीजों की मृत्युदर में बढ़ोतरी देखी गई है। डॉक्टर  मोहम्मद युसूफ अंसारी का कहना है कि सर्दियों के इस प्रभाव की जानकारी मरीजों और उनके परिवारवालों को अपने दिल की सेहत के प्रति ज्यादा ध्यान देने के लिए जागरूक करेगी।

उन्होंने कहा, “हार्ट फेलियर मरीज और उन मरीजों में जिनमें पहले से ही हृदय संबंधी परेशानियां हैं, उन्हें खासतौर से ठंड के मौसम में सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही अपने दिल की देखभाल के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव करने चाहिए।”

डॉ यूसुफ अंसारी ने बताया कि ठंड के हार्ट फेलियर वाली स्थिति तब होती है, जब हृदय शरीर की आवश्यकता के अनुसार ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाता है। इसकी वजह से दिल कमजोर हो जाता है या समय के साथ हृदय की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं। मौसम में तापमान कम हो जाता है, जिससे ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाते हैं. साथ ही शरीर में खून का संचार अवरोधित होता है।

इससे हृदय तक ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिसका मतलब है कि हृदय को शरीर में खून और ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए अतिरिक्त श्रम करना पड़ता है। इसी वजह से ठंड के मौसम में हार्ट फेलियर मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने का खतरा बढ़ जाता है।

दिल के दौरे अचानक तब होते हैं जब हृदय की ओर जाने वाली धमनियों (arteries) में से एक अवरुद्ध हो जाती है
और रक्त प्रवाह (blood flow) बंद हो जाता है। जिससे ऑक्सीजन के बिना, हृदय की मांसपेशियां मरने लगती हैं।डॉ यूसुफ अन्सारी ने हार्ट फेलियर के लिए खतरे के कुछ निम्न कारक बताए।

वायु प्रदूषण:

प्रदूषण से छाती में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और सांस लेने में परेशानी पैदा हो जाती है। आमतौर पर दिल की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होती है और प्रदूषण से दिल के मरीजों को गंभीर नुकसान पहुंचता है।

विटामिन-डी की कमी:

सूरज की रोशनी से मिलने वाला विटामिन-डी, हृदय में स्कार टिशूज को बनने से रोकता है, जिससे हार्ट अटैक के बाद, हार्ट फेल में बचाव होता है। सर्दियों के मौसम में सही मात्रा में धूप नहीं मिलने से शरीर में विटामिन-डी का स्तर कम हो जाता है, जिससे हार्ट फेल का खतरा बढ़ जाता है।

उच्च रक्तचाप:

ठंड के मौसम में शारीरिक कार्यप्रणाली पर प्रभाव पड़ सकता है, जैसे सिम्पैथिक नर्वस सिस्टम (जोकि तनाव के समय शारीरिक प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करता है) सक्रिय हो सकता है और कैटीकोलामाइन हॉर्मेन का स्राव हो सकता है। इसकी वजह से हृदय गति के बढ़ने के साथ रक्तचाप उच्च हो सकता है और रक्त वाहिकाओं की प्रतिक्रिया कम हो सकती है। इससे हृदय को अतिरिक्त काम करना पड़ सकता है। इस कारण हार्ट फेलियर मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ सकता है।

डॉ साहब ने सलाह दी कि कुछ स्वस्थ अभ्यास जो आपको हृदय रोगों के जोखिम को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है-

1. अच्छी तरह कपड़े पहनें ताकि आप पूरे दिन गर्म महसूस कर सकें।

2. हेल्दी चीजें खाएं और डाइट में बादाम, अखरोट जैसी हेल्दी चीजें शामिल करें।

3. हार्ट हेल्थ को बूस्ट करने के लिए रोजाना एक्सरसाइज जरूर करें। यह हार्ट से जुड़ी समस्याओं के खतरे को कम करने में मदद करता है।

4. धूम्रपान ना करें।

5.आपका वजन जरूरत से ज्यादा है तो वजन कम करने की कोशिश करें।

6. तनाव से खुद को दूर रखें क्योंकि यह हार्ट हेल्थ से जुड़ा होता है।

दिल की सेहत के लिए हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल नुकसान दायक हो सकता है। इसीलिए, ठंड के मौसम में अपने भोजन में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा पर नियंत्रण रखने की कोशिश करें। चूंकि, हाई कोलेस्ट्रॉल वाले भोजन से दिल को नुकसान होता है। इसीलिए, हाई फैट फूड ना खाएं। इसी तरह कम चीनी का भी सेवन अच्छा होता है।

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