मुंबई: रब्बानी फाउंडेशन और खरोली मुंबई के नेतृत्व में आयोजित तहफ्फुज ए नामुस ए रिसालत बोर्ड के कन्वेंशन को संबोधित करते हुए सय्यद मोइन मियां ने कहा कि दुनिया भर में मुकद्दस शख्सियतों की शान में तोहीन की जा रही है। उन्होंने तमाम अहले सिलसिला से अपने आपसी इख्तिलाफ को खत्म कर नबी ए करीम (सल्ल), सहाबा ए किराम और अहले बैत के गुस्ताखों से मुकाबले के तैयार रहने को कहा।

रज़ा एकेडमी के प्रमुख अल्हाज मोहम्मद सईद नूरी ने उलेमाओं से कहा कि हम तहफ्फुज ए नामूस ए रिसालत का पैगाम लेकर आए है। मुल्क भर के आशिकाने रसूल भी राब्ते में है। इसे अंदाजा होता है कि बोर्ड की मुहिम को स्वीकारा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि गुस्ताख ए रसूल सिर्फ मुल्क के लिए नही बल्कि पूरी दुनिया भर के अमन के लिए खतरा है। इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी संजीदगी से विचार हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुकद्दस शख्सियतों की शान में गुस्ताखी से नफरत परवान चढ़ती है। वहीं पैग़म्बर ए इस्लाम के बुनियादी उसूलों में नफरत को मिटाना और मुहब्बत-भाईचारा को बढ़ावा देना है। लेकिन कुछ मुट्ठी भर लोगों की आंखों में ये अमनो सुकून खटकता है। वो अपनी शर अंगेजी से न सिर्फ अपने वतन के दुश्मन बल्कि दुनिया को तबाह करने पर तुले है।

वहीं खानकाह ए रब्बानिया के पीर मुहम्मद अकबर शाह कादरी चिश्ती ने कहा कि हमारे नबी की शान में गुस्ताखी करने वाले नफरत के सौदागर है जो देश और दुनिया ही नही बल्कि इंसानियत के भी दुश्मन है। उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ताकि उनकी वजह से अमन खतरे में न पड़ जाए।

इस दौरान मौलाना मंजर हसन खान अशरफी, मौलाना गुलाम मुस्तफा, मौलाना अब्बास रज़वी, मौलाना हातिम ताई, मौलाना फिरोज बख्त अल कादरी, फारूक कुरेशी, मौलाना जफरुद्दीन रज़वी, मौलाना रजब अली, सय्यद मंजूर साहब आदि मौजूद रहे।