गुरुग्राम किडनी कांड में शामिल रहे उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिला स्थित पुरेनी गांव का रहने वाले डॉ देवेंद्र शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की टीम ने शर्मा को बुधवार को बापरौला से गिरफ्तार किया है। देवेंद्र दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में ट्रक और टैक्सी ड्राइवरों की हत्या के 50 से ज्यादा मामलों को अंजाम दे चुका है। वह शवों को अलीगढ़ मंडल के जिला कासगंज की हजारा कैनाल में फेंक देता था। वह कई राज्यों में फैले किडनी रैकेट से भी जुड़ा था। वह करीब 125 लोगों की किडनी अवैध रूप से निकालकर ट्रांसप्लांट कर चुका है।

शर्मा ने बिहार के सिवान से बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी) की डिग्री ली थी। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के डीसीपी राकेश पावेरिया ने बताया कि सूचना मिली कि सीरियल किलर और हत्या के एक मामले में ताउम्र सजायाफ्ता देवेंद्र शर्मा जयपुर की सेंट्रल जेल से जनवरी में 20 दिन के पैरोल पर बाहर आने के बाद से फरार है और दिल्ली में छुपा हुआ है।

जगारण के अनुसार, पूछताछ में देवेंद्र शर्मा ने बताया कि सिवान से बीएएमएस में स्नातक करने के बाद 1984 से 11 वर्ष तक जयपुर के बांदीकुई में जनता अस्पताल और डायग्नोस्टिक्स के नाम से क्लिनिक चलाया। 1982 में शादी हुई। वर्ष 1994 में थापर चैंबर में भारत फ्यूल कंपनी के कार्यालय ने गैस डीलरशिप देने की योजना चलाई। उसने इसमें 11 लाख रुपये का निवेश किया था, लेकिन कंपनी के अचानक गायब होने से उसका पैसा डूब गया। वर्ष 1995 में अलीगढ़ के छर्रा में भारत पेट्रोलियम की एक नकली गैस एजेंसी शुरू की।

उस दौरान पास के गांव दलालपुर निवासी राज, उदयवीर और वेदवीर के संपर्क में आया। उनके साथ मिलकर चालक की हत्या करके एलपीजी सिलेंडर ले जाने वाले ट्रकों को लूटना शुरू किया। फर्जी गैस एजेंसी में सिलेंडर उतारकर मेरठ में लूटे गए ट्रक को बेचते थे। डेढ़ वर्ष बाद उसे नकली गैस एजेंसी चलाने के लिए गिरफ्तार किया गया। इसके बाद वर्ष 2001 में उसने फिर अमरोहा में नकली गैस एजेंसी शुरू की।

1994 में भारी नुकसान के बाद वह जयपुर, बल्लभगढ़, गुरुग्राम और अन्य जगह चल रहे अंतरराज्यीय किडनी प्रत्यारोपण गिरोह में शामिल हो गया। उसे गुरुग्राम में डॉ. अमित द्वारा संचालित अनमोल नर्सिंग होम में किडनी रैकेट मामले में वर्ष 2004 में गिरफ्तार किया गया। 1994 से 2004 तक वह अवैध रूप से किए गए 125 से अधिक किडनी प्रत्यारोपण के लिए उसने किडनी देने वाले लोगों की व्यवस्था की। एक प्रत्यारोपण में उसे 5-7 लाख रुपये मिलते थे। इसी दौरान वह जयपुर गया और 2003 तक अपना क्लिनिक चलाता रहा।

इस दौरान उन लोग के संपर्क में आया, जो अलीगढ़ जाने के लिए टैक्सी किराये पर लेते और फिर चालक की हत्या कर टैक्सी लूट लेते थे। वे कासगंज के हजारा नहर में शव को फेंकते थे, जिसमें मगरमच्छ होते हैं, इसलिए किसी का भी शव नहीं मिलता था। लूटी हुई टैक्सी को कासगंज और मेरठ में 20-25 हजार रुपये में बेचता था।

Loading...
लड़के/लड़कियों के फोटो देखकर पसंद करें फिर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें

 

विज्ञापन