नई दिल्ली: वर्तमान में पूरी मानवता कोविड-19 महामारी, जिसके कारण पूरे विश्व में लाखों लोगों की जान गई है, से जूझ रही है। इससे बचाव के लिए वैक्सीन के आविष्कार और उसे जन-जन तक पहुंचने की आशा से लोगों में एक उम्मीद जगी है, ताकि जीवन पुनः सामान्य स्थिति में आ सके।

इस आशा के बीच में मुस्लिम उलेमाओं के एक ऐसे समूह  द्वारा समाज में फैलाई गई अफवाह कि “कोविड-19 वैक्सीन लगवाना हराम होगा क्योंकि यह सूअर की चर्बी से बनी हुई है” निश्चित रूप से एक  दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। भारत के संदर्भ में वैक्सीन पर यह टिप्पणी करना बिल्कुल उचित नहीं है क्योंकि भारत ने अभी तक किसी भी विदेशी कंपनी को कोविड-19 वैक्सीन ख़रीद का आर्डर नहीं दिया है।

ऑल इंडिया उलेमा और मशायख बोर्ड (AIUMB) के अध्यक्ष सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने अपने एक बयान में स्पष्ट किया है कि ‘कोविड-19 वैक्सीन सूअर की चर्बी से नही बनी है’ यह कथन इंडोनेशिया, जो स्वयं दवाइयों के लिए चीन पर निर्भर है, द्वारा फैलाया गया है।

उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की है कि वे इस प्रकार की किसी भी अफवाह से दूर रहें क्योंकि वैक्सीन में सूअर की चर्बी नहीं है।  वैक्सीन पूर्ण रूप से सुरक्षित है। वैक्सीन के खिलाफ अफवाह फैलाने से मुस्लिम समुदाय के बीच गलतफहमी पैदा होगी और उन लोगों के जीवन के लिए खतरा पैदा होगा जो वैक्सीन का प्रयोग नहीं करेंगे।  सभी मुसलमान भाइयों से अपील है कि वह इन अफवाहों से दूर रहकर  सदी की भीषण महामारी को भगाने में और कोविड-19 का टीकाकरण अपनाने में आगे आए।