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जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ मिलकर सरकार में शामिल बीजेपी ने अपना समर्थन वापस ले लिया है। सीजफायर सहित कई मुद्दों पर टकराव के चलते बीजेपी ने समर्थन वापस लेने का ऐलान किया।

महबूबा मुफ्ती सरकार में शामिल बीजेपी कोटे के सभी मंत्रियों और राज्य के सभी बड़े नेताओं सहित राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की मुलाक़ात के बाद ये फैसला लिया गया है। बीजेपी की ओर से समर्थन वापसी की चिट्ठी जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को सौंप दी गई है।

हालांकि अभी तक मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती को कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। काँग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जो कुछ भी हुआ अच्छा हुआ। जम्मू-कश्मीर की जनता को अब थोड़ी राहत मिलेगी। बीजेपी ने कश्मीर को बर्बाद कर दिया है। कई सैनिक और नागरिक बीते तीन सालों  में मारे गए हैं।

बीजेपी के महासचिव और जम्मू-कश्मीर के प्रभारी राम माधव ने कहा,  हम खंडित जनादेश में साथ आए थे, लेकिन इस मौजूदा समय के आकलन के बाद इस सरकार को चलाना मुश्किल हो गया था। महबूबा हालात संभालने में नाकाम साबित हुईं। हम एक एजेंडे के तहत सरकार बनाई थी। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर सरकार की हर संभव मदद की।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में साल 2015 में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन की सरकार बनी थी। गठबंधन के बाद मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बनाए थे। जबकि डिप्टी सीएम बीजेपी के खाते में गया था।  मुफ्ती मोहम्मद सईद ने 1 मार्च 2015 को जम्मू-कश्मीर के 12वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लिया था। 7 जनवरी 2016 को इनका निधन हो गया। जब सईद का निधन हुआ तो वो मुख्यमंत्री थे।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में 87 में से पीडीपी ने 28 जबकि बीजेपी के पास 25 सीटें जीती थीं। एनसी और कांग्रेस को क्रम से 15 और 12 सीटों पर जीत मिली थी।

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