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बिगड़ी अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार को तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. सत्ता पक्ष, विपक्ष और अब आरबीआई के पूर्व गवर्नरों ने भी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाना शुरू कर दिए है.

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन ने कहा कि बेहतर सालाना वृद्धि दर को बरकार रखने के लिये अर्थव्यवस्था को तेजी से पटरी पर लाने की जरूरत है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले महीनों में अर्थव्यस्था में मजबूती आ सकती है हालांकि सरकार को वृद्धि दर को बढ़ाने के लिये त्वरित उपाय करने होंगे.

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रंगराजन ने कहा कि, कुछ मायनों में यह कहा जा सकता है कि अर्थव्यवस्था अब गिरावट से उबर रही है, क्योंकि दो तिमाही के लिए वृद्धि दर 5.7 फीसदी पर बनी हुई है. रंगराजन ने कहा कि सालाना 6.5 फीसदी दर हासिल करने के लिए बाकी बची तीनों तिमाहियों में अर्थव्यवस्था का 7 फीसदी की दर से बढ़ना जरूरी है.

उन्होंने कहा कि जीएसटी को लेकर समस्याएं खत्म हो सकती हैं. साथ ही नयी मुद्रा आने से नोटबंदी का कुछ प्रभाव भी बेअसर हुआ है. उन्होंने अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सभी व्यावहारिक परियोजनाओं के पुनरुद्धार, बैंकों के पुनर्पूंजीकरण और उच्च कॉर्पोरेट निवेश के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने का सुझाव दिया.

ध्यान रहे हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर यज्ञ वेणुगोपाल रेड्डी ने भी मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर निशाना साधा था. वेणुगोपाल रेड्डी ने कहा है कि 1990 से 2014 के बीच भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ सबसे ज्यादा अच्छी रही. और ये कोएलिशन गवर्नमेंट्स (गठबंधन सरकारों) का दौर था. इसलिए, ये कहा जा सकता है कि शायद बहुमत वाली मजबूत सरकार की जगह गठबंधन सरकारें बेहतर इकोनॉमिक ग्रोथ दे सकती हैं.

उन्होंने वर्ष 1991 में भारत के भुगतान संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि अस्थिर राजनीतिक हालातों के बावजूद उन्होंने, जो कदम उठाए जाने की जरुरत थी उनके लिए एक आम राजनीतिक सहमति बनायी और इसका सफलतापूर्वक प्रबंधन किया.

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