कोरोना वायरस से निपटने के लिए भारत की राह पहले ही आसान नहीं थी। अब देश तेजी से कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे है। तो दूसरी और अस्पतालों में न तो पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर है और नही डॉक्टर के पास N95 मास्क। ऐसे में केंद्र के एक अनुमान के मुताबिक देश में अगले दो महीने में करीब 2.7 करोड़ एन-95 मास्क, 1.5 करोड़ पीपीई, 16 लाख डायग्नोस्टिक किट और 50,000 वेंटिलेटर की जरुरत होगी।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया, ‘जून 2020 तक 2.7 करोड़ एन-95 मास्क, 16 लाख टेस्टिंग किट और 1.5 करोड़ पीपीई की मांग का अनुमान है और इनकी खरीद की दिशा में काम किया जा रहा है।’ अधिकारी ने कहा, ‘जून 2020 तक वेंटिलेटर की मांग 50,000 आंकी गई है। इनमें से 16,000 पहले से ही उपलब्ध हैं और 34,000 वेंटिलेटर के लिए ऑर्डर दिए गए हैं।

भारत में वेंटिलेटर की कुल संख्या सरकारी और निजी अस्पताल मिलाकर 40 हजार के करीब है, जबकि कोरोना के कारण इसकी डिमांड काफी बढ़ गई है। कमी के कारण भारत ने चीन से वेंटिलेटर खरीदने का फैसला किया है लेकिन चीन की तरफ से जो बयान आए हैं उससे भारत के लिए चिंता बढ़ सकती है। दरअसल, चीन ने इसपर कहा है कि वह आवश्यक वेंटिलेटर भारत को देने के लिए तैयार है लेकिन फिलहाल उत्पादन में कठिनाई आ रही है क्योंकि उन्हें वेंटिलेटर बनाने के लिए कलपुर्जों का आयात करना पड़ेगा।

वहीं वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन ( WTO) ने कहा है कि भारत मेडिकल इक्विपमेंट, मेडिसिन, ऑक्सीजन मास्क पर सबसे ज्यादा ड्यूटी लगाता है। उसकी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत रेस्पिरेटर/वेंटिलेयर पर 10 पर्सेंट ड्यूटी लगाता है जबकि चीन केवल 4 पर्सेंट ड्यूटी लगाता है। यह रिपोर्ट ऐसे वक्त में आई है जब भारत वेंटिलेटर की भारी कमी से जूझ रहा है। सरकार ने 10 हजार वेंटिलेटर खरीद के लिए टेंडर भी जारी किया है।

अन्य मेडिकल प्रॉडक्ट्स की बात करें तो मोस्ड फेवर्ड नेशन्स (MFN) द्वारा मेडिसिन पर सबसे कम औसतन 2.1 फीसदी और पर्सनल प्रोटेक्टिव प्रॉडक्ट्स पर अधिकतम औसतन 11.50 फीसदी इंपोर्ट टैक्स लगाया जाता है जबकि भारत मेडिसिन पर 10 पर्सेंट और पर्सनल प्रोटेक्टिव प्रॉडक्ट्स पर 12 पर्सेंट इंपोर्ट टैक्स वसूलता है।

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