महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष मोदी सरकार को घेर रही है तो दूसरी और अब उम्मीद की जा रही है कि मौजूदा मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण बिल को कानून दर्जा मिल सकता है। लेकिन इसी बीच राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इस बिल पर आपत्ति जताई है।

रेखा शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि महिला आरक्षण बिल से केवल राजनेताओं की बीवियों और बेटियों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि उनके पास आरक्षण तंत्र का आरक्षण है। बता दें कि विपक्षी दलों की तरफ से इसी मॉनसून सत्र में लोकसभा और राज्यों की विधान सभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू करने मांग चल रही है।

उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से ‘भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में कहा , ‘अगर मुझसे पूछें तो मुझे आरक्षण को लेकर आपत्ति है। मेरे और आप जैसे लोगों को आरक्षण की मदद से राजनीति में प्रवेश करने में मुश्किल होगी। हमें अपना रास्ता खुद बनाना होगा। इससे सिर्फ कुछ नेताओं की बेटियों और पत्नियों को मदद मिलेगी।’

शर्मा ने कहा, ‘यदि 50 फीसदी आबादी को राजनीतिक तौर पर सशक्त नहीं किया गया तो हम कैसे विकसित होंगे? यह संभव ही नहीं है। निर्वाचन करना और निर्वाचित होना महिलाओं का अधिकार है।’ शर्मा ने कहा, ‘वे अमूमन चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को जानती ही नहीं हैं। वे नहीं जानतीं कि किसी व्यक्ति को किस आधार पर चुना जाना चाहिए। यदि हम यह ही नहीं जानेंगे कि सही व्यक्ति को कैसे चुना जाए तो कौन सुनिश्चित करेगा कि हमें हमारे अधिकार मिले?’

राजद नेता और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का हवाला देते हुए शर्मा ने कहा, ‘आपने देखा कि एक महिला बिहार की मुख्यमंत्री बनी। लेकिन सरकार उनके पति ने चलाई। क्या वह उस तरह काम कर पाईं जैसा वह चाहती थीं?’महिला आयोग की प्रमुख ने कहा कि अगर महिलाएं राजनीति में कदम रखना चाहती हैं तो उन्हें परिवार से जुड़ी चिंताओं को अलग रखना होगा।