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नेवी वॉर रूम लीक केस में बुधवार को कैप्टन (रिटायर्ड) सलाम सिंह राठौड़ को सात साल की सजा सुनाई गई है। हालांकि सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने दूसरे आरोपी जरनैल सिंह कालरा को बरी कर दिया।

विशेष सीबीआई जज एस के अग्रवाल ने सरकारी गोपनीयता कानून के तहत राठौर को जासूसी करने का अपराधी माना है। कोर्ट ने आधिकारिक रहस्य अधिनियम 1923 की धारा 3(1) के तहत राठौर को दोषी मानते हुए सात साल की सजा सुनाई।

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सलाम सिंह को नेवी वॉर रूम और एयरफोर्स हेडक्वॉर्टर से 7000 पन्नों के गोपनीय दस्तावेज और खुफिया जानकारी पैसों के लालच में अनाधिकृत व्यक्ति को दिये थे।अदालत ने सजा सुनाते वक्त अभियोजन पक्ष के इस तर्क पर गौर किया कि राठौर के कब्जे से ऐसे कई गोपनीय दस्तावेज बरामद हुए हैं जिनका उनके पास होने का कोई कारण नहीं है।

2005 के शुरुआत में यह मामला तब सामने आया जब उसके एक अन्य अधिकारी पर शादी के बाद अफेयर के आरोप लगे थे। जिसके बाद सीबीआई ने हथियार बेचने वालों के साथ-साथ कई अधिकारियों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था।

सीबीआई की चार्जशीट में दावा किया गया था कि राठौड़ के पास 17 गोपनीय दस्तावेज मिले थे, जिनका सीधा संबंध नेवी से ही था।

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