45 हजार करोड़ रुपये की पनडुब्बी खरीद परियोजना के ठेके पर न केवल विपक्ष सवाल उठा रहा है। अब इस मामले में रक्षा मंत्रालय और नौ सेना भी आमने-सामने हैं। नेवी ने इसका कडा विरोध किया है। बता दें कि इस ठेके के तहत छह पनडुब्बियों का निर्माण किया जाना है, जिनमें पेट्रोल और डीजल दोनों पर चलने वाली पनडुब्बियां शामिल हैं। इस परियोजना की अनुमानित लागत 45 हजार करोड़ रुपये है।

इकनॉमिक टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक ‘मेक इन इंडिया’ के तहत सबसे बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट के लिए पांच आवेदन सामने आए थे जिसमें से नेवी की ‘एम्पॉवर्ड कमेटी’ ने दो को चुना है। इसमें मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और लारसन एंड टूब्रो शामिल हैं। इन दोनों को ही सबमरीन बनाने में अच्छा अनुभव है। ‘एम्पॉवर्ड कमेटी’ के सुझाव को दरकिनार करते हुए सरकार अडाणी जेवी को भी 75-आई प्रोजक्ट के सौदे के लिए चुन रही है। दोनों के बीच विवाद की यही वजह है। डिपॉर्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन ने सुझाव दिया है कि एचएसएल-अडाणी ज्वॉइंट वेंचर को भी शामिल किया जाना चाहिए।

इस पर कांग्रेस ने भी सवाल उठाते हुए दी सरकार ने शून्य अनुभव वाली अडाणी की कंपनी को ठेके की बोली में शामिल करने के लिए रक्षा खरीद प्रक्रिया- 2016 (डीपीपी) को रोक दिया है। कांग्रेस मीडिया सेल प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार और पीएमओ ने भारतीय नौसेना द्वारा स्थापित अधिकार प्राप्त समिति द्वारा दिए गए सुझावों को खारिज किया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस सौदे को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि रक्षा मंत्रालय के माध्यम से सरकार नौसेना को अडाणी डिफेंस और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) के संयुक्त उपक्रम को परियोजना का ठेका देने के लिए दबाव बना रही है। इस मामले पर शुक्रवार को रक्षा मंत्रालय को विचार करना है। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए पिछले साल अप्रैल में अभिरुचि पत्र आमंत्रित किए गए थे।

सुरजेवाला ने बताया कि नौसेना की अधिकार प्राप्त समिति ने इस परियोजना के लिए योग्य नहीं पाए जाने के कारण अडाणी की बोली को खारिज करते हुए बाकी प्राप्त निविदाओं में से सिर्फ मजगांव डॉक लिमिटेड और एलएंडटी की निविदा को वैध पाते हुए रक्षा मंत्रालय से इनके नामों पर विचार करने की सिफारिश की थी, लेकिन सरकार ने इसमें अड़ंगा लगाते हुए अधिकार प्राप्त समिति को नजरअंदाज करके अडाणी की कंपनी को पिछले दरवाजे से बोली में भाग लेने की अनुमति दे दी। उन्होंने बताया कि इस सौदे में भाग लेने वाली जो तीन कंपनियां हैं, लारसन एंड टूब्रो लिमिटेड, मजगांव डॉकशिप बिल्डर्स लिमिटेड और रिलायंस नेवल, उनके पास अपना शिपयार्ड है, लेकिन अडाणी डिफेंस के पास अपना कोई शिपयार्ड भी नहीं है।

Loading...
लड़के/लड़कियों के फोटो देखकर पसंद करें फिर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें

 

विज्ञापन