देश भर में अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के धार्मिक स्थलों को हिन्दू धर्म से जोड़कर निशाना बनाना कोई नई बात नहीं है. लेकिन अब सऊदी अरब में स्थित इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र स्थल मक्का को शिव मंदिर बताकर मुस्लिमों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. जिसमे मीडिया भी पीछे नही है.

हाल ही में हिंदू महासभा ने हिन्दू नववर्ष के मौके पर भड़काऊ कैलेंडर जारी कर ताजमहल को तेजो महालय, मक्का को मक्केश्वर महादेव, कुतुबमीनार को विष्णु स्तंभ बताया. साथ ही यह संदेश छापा गया है कि मक्का में कभी शिव मंदिर था. इसलिए शिवलिंग आज भी खंडित अवस्था में मौजूद है.

हिंदू महासभा के बेतुके दावों को आधार मानकर जी न्यूज़ के वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश कुमार सिंह ने दावा किया कि काबा एक शिव मंदिर था और जिस पत्थर को मुस्लिम चूमते है वो शिव मंदिर का पत्थर है.

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उन्होंने ट्विट्टर पर लिखा – क्या मक्का में एक समय शिवमंदिर था? हिंदु महासभा के एक कैलेंडर के प्रकाशन के बाद इस पर नये सिरे से विवाद हो गया है। लेकिन क़ाबा में इस्लाम की स्थापना से पहले मूर्ति पूजा होती थी और वहाँ का काला पत्थर मंदिर का हिस्सा था, ये बात तो महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन ने भी लिखी है, पढ़ें!

पत्रकार ने एक और ट्वीट में कहा कि  कभी मंदिर का हिस्सा रहे क़ाबा के काले पत्थर को हज के समय दुनिया भर से मक्का आने वाले करोड़ों मुसलमान क्यों चुंबन देते हैं, इसके बारे में भी लिखा है महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन ने!

एक और ट्वीट में उन्होंने अटाला मस्जिद का ज़िक्र करते हुए दावा किया-अटाला देवी के मंदिर की जगह पर ही और मंदिर की ही ज़्यादातर सामग्री का इस्तेमाल कर जौनपुर के तत्कालीन शासक इब्राहिम शाह शर्की ने 1408 ईस्वी में इस बड़ी मस्जिद का निर्माण कराया, जो फ़िलहाल अटाला मस्जिद के तौर पर जानी जाती है। मशहूर इतिहासकार आर सी मजूमदार ने भी इसका ज़िक्र किया है!

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