सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम बहुविवाह, निकाह हलाला, निकाह मुता और निकाह मिस्यार के खिलाफ दायर की गईं 4 याचिकाओं पर केंद्र सरकार और लॉ कमीशन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.

भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय और तीन तलाक मामलें में पिटीशन लगाने वाली सायरा बानो ने मिलकर पीआईएल दायर की है. जिस पर प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने इस दलील को स्वीकार किया कि पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 2017 के अपने फैसले में तीन- तलाक को खत्म करते हुए बहुविवाह और निकाह हलाला के मामलों को इसके दायरे से बाहर रखा था.

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पीठ ने आज कहा कि पांच सदस्यों वाली नयी संविधान पीठ का गठन किया जाएगा जो बहुविवाह और निकाह हलाला के मामले पर गौर करेगी. ध्यान रहे बीते साल अगस्त में पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने 3:2 के बहुमत से तीन तलाक प्रथा को असंवैधानिक घोषित कर दिया था, जबकि हलाला निकाह और बहुविवाह को चुनौती देने वाली याचिकाओं को आगे की सुनवाई के लिए खुला रखा था.

इसके अलावा कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वह इस मसले पर नया कानून बनाये, तब तक छह माह की अवधि तक ‘ट्रिपल तलाक’ पर रोक रहेगी. छह माह का समय बीत जाने के बाद भी सरकार कानून नहीं बना पायी है.

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