सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण देने की इजाजत दे दी है। जब तक इस मुद्दे पर संवैधानिक पीठ में सुनवाई पूरी नहीं हो जाती।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि यह मामला संविधान पीठ में है, इसलिए इसपर आखिरी फैसला लेने का अधिकार उन्हीं के पास है. संविधान पीठ जबतक इस मामले में फैसला नहीं लेती है तब तक केंद्र सरकार एससी/एसटी सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण देती रहेगी.

बता दें कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर फैसला दिया था कि पांच जजों की संविधान पीठ मामले की सुनवाई करेगी। इससे पहले विभिन्न हाईकोर्ट ने नौकरी में पदोन्नति में आरक्षण को रद्द करने का आदेश दिया था। क्योंकि उनके अपर्याप्त प्रतिनिधत्व के बारे में आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। जिसके बाद कई राज्य सरकारों ने हाईकोर्ट के पदोन्नति में आरक्षण रद्द करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पैरवी करने पहुंचे अतिरिक्त सॉलिस्टिर जनरल मनिंदर सिंह ने कहा कि कमर्चारियों को प्रमोशन देना सरकार का दायित्व है. देश के अलग-अलग हाईकोर्ट के फैसलों के चलते केंद्र सरकार एससी/एसटी समाज के कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण नहीं दे पा रही है. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसलों पर रोक लगाते हुए कि केंद्र सरकार प्रमोशन में आरक्षण दे सकती है.

मालूम हो कि कार्मिक विभाग ने 30 सितंबर 2016 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें प्रमोशन में आरक्षण पर रोक लगा दी गई थी.

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