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भारत के इतिहास में पहली बार कोई एतिहासिक इमारत किसी कॉरपोरेट घराने के हाथों में गई हो. केंद्र की मोदी सरकार ने मुगल बादशाह शाहजहाँ द्वारा बनवाए गए दिल्‍ली स्थित लाल किले को पांच वर्षों के लिए डालमिया भारत ग्रुप को सोपं दिया है.

डालमिया ग्रुप ने नरेंद्र मोदी सरकार की ‘अडॉप्‍ट ए हेरिटेज’ नीति के तहत इसे गोद लिया है. पांच साल के कांट्रैक्‍ट पर ऐतिहासिक इमारत को गोद लिया गया है. ये कांट्रैक्‍ट 25 करोड़ की कीमत पर हुआ है.

9 अप्रैल को पर्यटन मंत्रालय, संस्‍कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण के साथ ये समझौता हुआ. डालमिया ग्रुप लाल किला को पर्यटकों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए उसे नए सिरे से विकसित करने के तौर-तरीकों पर विचार कर रहा है.

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डाल‍मिया भारत ग्रुप के सीईओ महेंद्र सिंघी ने कहा कि लाल किला में 30 दिनों के अंदर काम शुरू कर दिया जाएगा. उन्‍होंने कहा, “लाल किला हमें शुरुआत में पांच वर्षों के लिए मिला है. कॉन्ट्रैक्‍ट को बाद में बढ़ाया भी जा सकता है. हर पर्यटक हमारे लिए एक कस्‍टमर होगा और इसे उसी तर्ज पर विकसित किया जाएगा. हमारी कोशिश होगी कि पर्यटक यहां सिर्फ. एक बार आकर ही न रुक जाएं, बल्कि बार-बार आएं”

बता दें कि सरकार ने ‘एडॉप्ट ए हेरीटेज’ स्कीम सितंबर 2017 में लॉन्च की थी. देश भर के 100 ऐतिहासिक स्मारकों के लिए ये स्कीम लागू की गई है. इसमें ताजमहल, कांगड़ा फोर्ट, सती घाट और कोणार्क मंदिर जैसे कई प्रमुख स्थान हैं. ताज महल को गोद लेने के लिए जीएमआर स्पोर्ट्स और आईटीसी अंतिम दौर में है.


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