Saturday, November 27, 2021

सुप्रीम कोर्ट का SC-ST एक्ट में बदलाव से इंकार, नहीं होगी गिरफ्तारी आसान

- Advertisement -

सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति-जनजाति कानून ( एससी-एसटी ऐक्ट) को लेकर दिए अपने फैसले पर रोक लगाने के केंद्र सरकार के अनुरोध खारिज कर दिया. इस मामले में अगली सुनवाई 16 मई को होगी.

केंद्र सरकार यह आरोप लगाती रही है कि दलित कानून में संशोधन वाला फैसला विधायिका के कार्यों में दखलंदाजी है और यह नया कानून लिखने जैसा है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह दलित अधिकारों के संरक्षण और उनके खिलाफ अत्याचार के दोषियों को दंडित करने की हिमायती है.

जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस उदय यू ललित की बेंच ने कहा कि शीर्ष अदालत ऐसे नियम या दिशानिर्देश नहीं बना सकती जो विधायिका की ओर से पारित कानून के विपरीत हों. कोर्ट ने यह भी कहा कि जबतक पुनर्विचार याचिका पर फैसला नहीं हो जाता है तबतक उसका फैसला लागू रहेगा.

dalit 11

कोर्ट ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि इस अपराध में अधिकतम सजा 10 वर्ष और न्यूनतम सजा 6 माह है तो अग्रिम जमानत का प्रावधान क्यों नहीं होना चाहिए. एससी-एसटी के तहत जिन लोगों की गिरफ्तारी होती है उनकी प्राथमिक जांच होनी चाहिए.

कोर्ट ने कहा कि फिलहाल ऐसा हो रहा है कि सभी मामलों में गिरफ्तारी हो रही है, बावजूद इसके कि पुलिस को लगता है कि मामला फर्जी हो सकता है. लिहाजा प्राथमिक जांच इस तरह के मामलों में होनी चाहिए और तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं होना चाहिए.

अदालत ने कहा, ‘अग्रिम जमानत का प्रावधान टाडा और मकोका जैसे कानूनों में भी नहीं है, जहां अपराध की प्रकृति ज्यादा गंभीर मानी जाती है. अपराध गंभीर होने पर अदालत का यह आदेश गिरफ्तारी की राह में नहीं आएगा.’

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने एससी/एसटी ऐक्ट के तहत अपराध के मामलों में एफआईआर दर्ज होने पर रोक नहीं लगाई है, उसने तो बस एफआईआर दर्ज होने से पहले घटना की पुष्टि कराने के बारे में व्यवस्था दी है, ताकि निर्दोषों को सजा नहीं मिले.

- Advertisement -

[wptelegram-join-channel]

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles